
आज दशहरा है। हिंदू धर्म के खास त्यौहारों में से एक है दशहरा। जैसा कि सब जानते है कि आज के दिन भगवान राम ने रावण को मारा था। यानी अच्छाई की बुराई पर जीत हुई थी। लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे अवशेष के बारे में जो श्रीलंका में आज भी रामायण की सत्यापित करते हैं। श्रीलंका में एक जगह है लंकापुर, यह वो जगह है जहां रावण की लंका हुआ करती थी। यहां आज भी रावण के महल के अवशेष मौजूद हैं। इसके अलावा लंका में ऐसे कई मंदिर और जगहें हैं जब रामायण के समय महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थी। कहते हैं कि लंकापुरा रावण का गढ़ हुआ करता था। यहां आज भी हनुमान मंदिर, सीता मंदिर, अशोक वाटिका, रावण की साधना करने वाली जगहें मौजूद हैं। इसके अलावा यहां वो जगह आज भी मौजूद है जहां रावण का वध हुआ था। देखिए ऐसी और कौन-सी जगहें आज भी श्रीलंका में मौजूद हैं...जैसे यह- सीता टियर तालाब श्रीलंका में ही कैंडी से लगभग 50 किलोमीटर दूर नम्बारा एलिया रोड़ पर एक तालाब है, जिसको सीता टियर तालाब कहते हैं। ऐसा कहते हैं कि यह तालाब कभी नहीं सूखता। चाहे कितनी भी गर्मी हो। बेहद गर्मी के दिनों में जब आसपास के कई तालाब सूख जाते हैं तो भी यह कभी नहीं सूखता। लेकिन इस तालाब का पानी खारा है। कहते हैं कि रावण जब सीता माता को हरण करके ले जा रहा था तो इसमें सीता जी के आंसू गिरे थे।

रावण के द्वारा बनाई गई सुरंगें श्रीलंका में रावनागोड़ा नाम से एक जगह है। इस जगह पर कई गुफाएं और सुरंगें भी हैं। लोगों का मानना हैं कि यहां की कई सुरंगें तो साउथ अफ्रीका तक फैली हुई है। ऐसा भी कहा जाता है कि इन्ही सुरंगों में रावण ने अपना सोना और खजाना छुपाया था।

पुष्पक विमान स्थल श्रीलंका के सिन्हाला शहर में वेरागनटोटा नाम से एक जगह है। जिसका अर्थ ‘विमान उतरने की जगह’ है। कहते हैं कि यही वो जगह है जहां रावण का पुष्पक विमान उतरता था।

अशोक वाटिका वो जगह, जहां रावण ने माता सीता को रखा था। आज इस जगह को सेता एलीया के नाम से जाना जाता है। यह जगह नूवरा एलिया नामक जगह के पास आज भी मौजूद है। यहां सीता का मंदिर है और पास ही एक झरना भी है। कहते हैं देवी सीता यहां स्नान किया करती थीं। इस झरने के आसपास की चट्टानों पर हनुमान जी के पैरों के निशान भी मिलते हैं। यहां वो पर्वत भी है जहां हनुमान जी ने पहली बार कदम रखा था, इसे पवाला मलाई कहते हैं। यह पर्वत लंकापुरा और अशोक वाटिका के बीच में है।

युद्ध का स्थान श्रीलंका रामायण रिसर्च कमेटी ने एक जानकारी दी जिसके तहत उनके द्वारा की गई रिसर्स में भगवान हनुमान का श्रीलंका में उत्तर दिशा से एंट्री ली थी। वहां हनुमान जी के प्वायंट नागदीप से शुरु होने के निशान मिले हैं। इसके अलावा उस जगह का भी पता लगा है जहां पर राम व रावण के बीच युद्ध हुआ था। श्रीलंका में आज भी उस युद्घ-स्थान को युद्घागनावा नाम से जाना जाता है।