अस्पताल पहुंचने के पहले ही तैयार हो जाएंगे गर्भवती के पर्चे, आते ही शुरू होगा उपचार
उज्जैन. प्रदेश के बाद चरक अस्पताल को अब देश का रोल मॉडल बनाने के लिए यहां फॉरेन कल्चर आधारित उपचार व्यवस्था शुरू की जाएगी, जिसके तहत प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवती का घर से उपचार शुरू कर दिया जाएगा। योजना को शनिवार को आए एनएचएम के एमडी ने हरी झंडी दी है। हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी का कम करने के लिए यह योजना बनाई गई है।
शनिवार को नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी डॉ. एस विश्वनाथन ने चरक अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल पहुंचने वाली हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी केसेस के आंकड़े को देखकर चिंता व्यक्त की। चरक अस्पताल पहुंचने वाली कुल गर्भवती महिलाओं में से ५० फीसदी महिलाएं हाइ रिस्क होती हैं, जिस वजह से रेफर केसेस की संख्या बढ़ती है। इन्हें रोकने के लिए सिविल सर्जन डॉ. राजू निदारिया ने फॉरेन कल्चर ट्रीटमेंट प्रोग्राम अपनाने की बात कही। जिस पर एमडी ने सहमति जताते हुए इसे लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
पूरी व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत
सिविल सर्जन डॉ.राजू निदारिया ने बताया यदि हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी केसेस कम करना है तो प्राथमिक स्तर से ही डिलिवरी प्रकरणों को उपचार उपलब्ध करवाना होगा। इसके लिए पूरी व्यवस्थाओं में ही सुधार की आवश्यकता है। चरक अस्पताल में जिले हाइ रिस्क केसेस के अलावा सुसनेर, सोयत, शाजापुर, शुजालपुर सहित अन्य जिलो के हाइ रिस्क केसेस आते हैं, जिस वजह से रेफर संख्या बढ़ती है। हालांकि इस पर नियंत्रण किया गया है। बावजूद इस संख्या को कम करने की आवश्यकता है। जो कि बगैर जमीनी सुधार के संभव नहीं है। इसलिए ये योजना बनाई है। यदि ये ठीक ढंग से लागू होती है। तो चरक देश का रोल मॉडल अस्पताल बन सकता है। इससे गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक फायदा मिलेगा।
यह होगा