
Snake bite incident: बरसात का मौसम सिर्फ जलभराव और मच्छरो की परेशानी नहीं लाता, बल्कि सांपों के घरों तक पहुंचने का खतरा भी बढ़ा देता है। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के घट्टिया थाना के गांव इसाकपुर से ऐसा ही एक मामला सामने आया। यहां घर में सो रहे ग्रामीण नटवरलाल सोलंकी (50) के ऊपर सांप चढ़ गया। उनकी नींद खुली तो सांप को सीने पर चढ़ा देख घबरा गए और सांप को हटाने के दौरान वे सर्पदंश की चपेट में आ गए।। घटना रविवार-सोमवार रात करीब डेढ़ बजे की है। नटवरलाल की आवाज सुनकर घर वाले जागे। सांप को भगाने के बाद वे उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई और कुछ ही देर में घर पर मातम पसर गया।
सर्प विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में शाम के वक्त ठंडक पाने के लिए सांप बिल सेनिकलते हैं वहीं बारिश के महीनों में सांप बिलों में पानी भरने के कारण वेसुरक्षित और सूखी जगह तलाशते हैं। ऐसे में घर, गोदाम, लकड़ी-कबाड़ के ढेर और खेतो के आसपास उनके पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। रात के समय खतरा अधिक रहता है। ऐसे में घर के आसपास झाडियां और कबाड़ जमा न होने दें। दरवाजों के नीचे के बड़े गैप बंद रखें और चूहों की आवाजाही रोकें, क्योंकि चूहे सांपों को आकर्षित कर सकते हैं। रात में फर्श पर सोने से बचें और सोने से पहले बिस्तर व कमरे की जांच करें। खेत या अंधेरे में जाते समय टॉर्च और
मजबूत जूते का उपयोग करें।
सर्पदंश के बाद घबराएं नहीं और पीड़ित को कम से कम हिलाएं। प्रभावित स्थान पर घरेलू उपचार या किसी तरह की छेड़छाड़ से बचें। तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है।
-मरीज को शांत रखें और घबराने न दें।
-प्रभावित हिस्से को कम से कम हिलाएं।
-तुरंत अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
-प्रभावित स्थान पर घरेलू उपचार या किसी तरह की छेड़छाड़ से बचें।
-रस्सी या कपड़े से कसकर न बांधें।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद दांगी के अनुसार, सर्पदंश के मामलों में झाड़फूंक का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सकीय उपचार मिलेगा, उसके बचने की संभावना उतनी अधिक होगी। एंटी स्नेक वेनम ही प्रभावी उपचार है। इसलिए सर्पदंश की स्थिति में अंधविश्वास से दूर रहें और तत्काल चिकित्सा सहायता लें। यही सतर्कता जीवन बचा सकती है।