अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाने के कान्सेप्ट पर बनी फिल्में हमेंशा भरती हैं जोश
उज्जैन. अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाने के कान्सेप्ट पर बनी फिल्में हमेंशा भरती हैं जोश...स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र...अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाने के कान्सेप्ट पर बनी उस जमाने की फिल्में आज भी दिलों में जोश भरती हैं, वहीं इन फिल्मों के गीतों का जलवा अब भी बरकरार है। इन नगमों को जब कभी भी सुनें, या गुनगुनाएं, तो देशप्रेम का जज्बा दिलों में हिलौरें भरने लगता है। आइए जानें वे कौन-कौन सी फिल्में हैं, जिनके गीत हम आज भी भुलाए नहीं भूलते।
इस कलाकार का नाम ही पड़ गया था भारत कुमार
जी हां, हिन्दी सिने जगत में मनोजकुमार की बनाई या उन पर फिल्माई गई फिल्मों के कारण इंडस्ट्री ने उनका नाम मनोजकुमार से बदलकर भारत कुमार रख दिया था। मनोजकुमार ने उपकार, क्रांति, रोटी-कपड़ा और मकान, पूरब और पश्चिम जैसी कई हिट फिल्में दी हैं। इन फिल्मों में उन्होंने किसान और देश पर बनी विकट परिस्थितियों को रुपहले पर्दे पर बखूबी निभाया।
ये हैं वे गीत जो कर देते हैं रोंगटे खड़े
- ऐ मेरे प्यारे वतन...ऐ मेरे बिछड़े चमन...तुझपे दिल कुर्बान
- मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती...मेरे देश की धरती
- ये देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का...
- कर चले हम फिदा, जानों तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
- ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी...याद करो कुर्बानी
- अपनी आजादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं...सर कटा सकते हैं लेकिन...
- अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे...
- छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नए दौर में लिक्खेंगे, मिलकर नई कहानी
- हर करम अपना करेंगे, ऐ वतन तेरे लिए...
- मेरे देशप्रेमियों...आपस में प्रेम करो, देशप्रेमियों...
- सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलसितां हमारा...
- वतन पे जो फिदा होगा, अमर वो नौजवां होगा...