अपने कर्तव्य से प्यार करते हैं ये युवा, लोगों की खुशी और संतुष्टि ही इनके लिए है वैलेंटाइन
अनिल मुकाती @ उज्जैन
14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। पाश्चात्य संस्कृति के इस दिन किसी के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया जाता है। भारतीय संस्कृति में इस दिन का कोई स्थान नहीं है, लेकिन युवा इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। मालवा में इस दिन मातृ-पितृ पूजन भी किया जाता है। वहीं कई लोग ऐसे हैं जिनके लिए उनका कर्म ही उनका वैलेंटाइन है। वे समाज के लिए किए गए अपने कर्म से प्रेम बांटते हैं और प्रेम पाते हैं। वैलेंटाइन डे पर कुछ ऐसे ही समाजसेवी की पहचान करा रहे हैं जो अपने कर्म से पहचाने जाते हैं और विकट परिस्थिति में भी अपने कार्य के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
ग्रामीण बच्चों को दे रहे निशुल्क कोचिंग
गरीब परिवार के बच्चों के लिए शिक्षक दीपेन्द्र सिंह गौतम पानबिहार में नि:शुल्क कोचिंग वर्षों से चला रहे है। बच्चूखेड़ा निवासी शिक्षक दीपेंद्र सिंह गौतम प्रतिदिन पैदल चलकर बच्चूखेड़ा से पानबिहार पहुंचकर सुबह 6 बजे से 10 बजे तक मुफ्त कोचिंग पढ़ाते हैं। टेस्ट के माध्यम से इन्हें कौशल व दक्षता करा रहे है। बारिश और ठंड के समय भी प्रतिदिन कोचिंग लगती है। शिक्षक गौतम का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवार के बच्चे निवास करते हैं इन लोगों के पास महंगी कोचिंग में पढऩे के लिए रुपए नहीं होते है। मोबाइल खरीदने और इंटरनेट पैक डलवाने के रुपए बमुश्किल मिलते हैं और परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल होता है। प्रतिदिन गांव में जाकर छात्र-छात्राओं को उनकी पढ़ाई करवा रहे। हम चाहते हैं कि हर विद्यार्थी अच्छी पढ़ाई कर देश व प्रदेश में अपने गांव का नाम रोशन करें। मेरे द्वारा पढ़ाए गए कई विद्यार्थी सरकारी संस्था और निजी संस्था में उच्च पदों पर सेवा दे रहे हंै। जिन्हे देखकर हमें बहुत खुशी होती है। मेरा प्रयास है कि हर गांव का बच्चा पढ़-लिखकर गांव और अपने माता-पिता का नाम रोशन करें।
लोगों से बन गया खून का रिश्ता
ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीज को ब्लड की आवश्यकता होती है तो परिजन परेशान हो उठते हैं। ऐसे ही मरीजों के लिए बड़े मददगार के रूप में घट्टिया तहसील के ग्राम मीण के समाजसेवी दिनेश शर्मा कार्य कर रहे हैं। शर्मा ने समाजसेवा के कार्य के रूप में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान बना रखी है। समाजसेवी शर्मा ने वाट्सऐप पर 'विप्र रक्त संगठनÓ ग्रुप बनाया है, जिसमें लगभग 2५0 से अधिक मित्र जुड़े है। जो लंबे समय से जरूरतमंदों को खून देकर न केवल मदद कर रहे वरन जान भी बचा रहे हैं। इस ग्रुप से जुड़े सदस्य महज एक सूचना पर 1 घंटे की भीतर ही रक्तदान करने पहुंच जाते है। शर्मा लोगों को रक्तदान कर जीवन ही नहीं बचा रहे हैं बल्कि गांवों के गरीब बच्चों के जीवन में शिक्षा का अलख भी जगा रहे हैं। उन्होंने गांव में गरीब बच्चों के लिए न्यूनतम शुल्क में कोचिंग क्लास चला रहे हैं। करीब 15 वर्षों से वे बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
दिव्यांगों की करते हैं मदद, दिलवाते हैं प्रतियोगी परीक्षा
आंखों के बगैर मनुष्य जीवन अधूरा है, अगर आंख ही ना हो तो जीवन अंधकारमय है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ऐसे लोगों के अंधरे जीवन में शिक्षा का उजियारा फैलाने का कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में कई स्थानों पर दृष्टिबाधित प्रतिभागियों को परीक्षाओं में लेखन के लिए कुछ लोग मदद का हाथ बढ़ाते हैं। इनकी मदद से हर साल सैकड़ों दृष्टिबाधित की जिंदगी रोशन होती है। ये युवा सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर निशुल्क मदद करते हंै। इस कार्य की शुरुआत सात साल पहले करणसिंह कुशवाह ने निस्वार्थ सेवा, निशुल्क सेवा के माध्यम से की और आज उनके संगठन से हजारों युवा जुड़ चुके हैं, जो इंदौर, उज्जैन सहित देशभर के शहरों में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों और प्रतिभागियों की मदद कर रहे हैं। उनका एक ही मकसद है कि दृष्टिबाधित लोगों की आंखें बनकर उनके जीवन में प्रकाश फैलाना। कुशवाह का कहना है अ मिशन फॉर सोसायटी के सूत्रवाक्य के साथ संगठन ने मध्यप्रदेश के साथ आसपास के राज्यों में भी कुछ जिलों में सेवा प्रदान की। जैसे महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर। अब तक संगठन के माध्यम से लगभग 6000 बार राइटर्स उपलब्ध कराएं हैं।