इस बार ज्यादा धमाके नहीं कर सकेगा दशानन

नहीं मिल रहा बारूद, महंगे दामों पर मंगवाए चायनीज पटाखे

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Oct 17, 2015
patrika
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उज्जैन. पेटलावद हादसे के बाद प्रशासन की ओर से पटाखा कारखानों और दुकानों पर सख्ती की गई, जिसका असर विजयादशमी और दीपावली पर्व पर दिखाई दे रहा है। इसके चलते रावण दहन से पहले होने वाली आतिशबाजी के लिए आयोजकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा। नतीजन उन्हें प्रदेश के बाहर से कारीगर बुलाना पड़ रहे हैं। इस कारण तीन गुना ज्यादा खर्च हो रहा है, वहीं कारीगर भी सीमित मात्रा में ही कच्चा माल लाएंगे। इस कारण दो घंटे तक होने वाली आतिशबाजी का समय भी घटकर सिर्फ आधा घंटा रह गया है। वहीं कुछ आयोजकों ने महंगे दामों पर चायनीज पटाखे भी मंगवाए हैं।

9 कारखाने और 15 दुकानों के लाइसेंस रद्द
प्रदेश में लगभग सभी कारखानों और स्थाई दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। इसमें उज्जैन जिले के 9 कारखाने और 15 स्थाई दुकानें भी शामिल हैं। झाबुआ जिले के पेटलावद में डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ों में विस्फोट में 90 लोगों की मौत के बाद शासन के निर्देश पर पटाखा बनाने वाले कारखानों और दुकानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई। इसके चलते विजयादशमी पर्व पर रावण दहन से पहले होने वाली आतिशबाजी फीकी हो गई है।

आने से डर रहे कारीगर
कार्तिक मेला ग्राउंड पर होने वाले रावण दहन के आयोजक चेतन यादव ने बताया कि आतिशबाजी के लिए इस बार बहुत परेशानी आ रही है। कारखाने बंद होने के कारण बाहर से कारीगरों को बुलाना पड़ रहा है, लेकिन प्रदेश में प्रतिबंध होने के चलते वे भी आने से डर रहे हैं। आतिशबाजी करने वाले कारीगर बारूद लेकर आते हैं और मौके पर आतिशबाजी के आयटम तैयार करते हैं। बड़ी मुश्किल से कारीगर आने को तैयार हुए हैं। इसके लिए पिछली बार की तुलना तीन गुना अधिक खर्च हो रहा है।

चायनीज पटाखे मंगवाए
शास्त्रीनगर में होने वाले रावण दहन के आयोजक जयसिंह दरबार ने बताया कि इस बार आतिशबाजी के लिए काफी मशक्कत करना पड़ रही है। बारूद की कमी के कारण के कारण कोई कारीगर आने को तैयार ही नहीं है। दूसरे प्रदेशों के कारीगरों को बात की, लेकिन इसमें खर्चा बहुत हो रहा है। इसके चलते इस बार आतिशबजी के लिए चायनीज पटाखे मंगवाए हैं। हालांकि खर्च इसमें भी कम नहीं है।

रख रहे पैनी नजर
पेटलावद हादसे के बाद प्रदेश में सभी जगह लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। उज्जैन में 9 कारखाने और 15 दुकानों के लाइसेंस रद्द इस बार किए गए हैं। बारूद से पटाखे बनाने वालों पर बारीक नजर रखी जा रही है। इसके लिए भी टीम बाजार में नजर रखे हुए हैं।
अवधेश शर्मा, एडीएम
Published on:
17 Oct 2015 10:06 pm