पहली बार निगम के बड़े अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा
उज्जैन. निगम अपर आयुक्त रवींद्र जैन के यहां लोकायुक्त छापे में भले ही बेनामी संपत्ति कम मिली हो, लेकिन जिस भी अधिकारी के पास यहां निगम कॉलोनी सेल का प्रभार होता है उन्हें हर फाइल पर मोटी कमाई होती है। कॉलोनी की अनुमति, पूर्णता प्रमाण पत्र, बंधक प्लॉटों की मुक्ति नियमों को नजरअंदाज कर एनओसी देने सहित कॉलोनी संबंधी फाइले बगैर रिश्वत आगे नहीं बढ़ती। नवबंर २०१४ से पदस्थ जैन के पास निगम कॉलोनी सेल का चार्ज है। बीच में उनका तबादला भी हुआ था, लेकिन बाद में फिर रुक गया।
पहली बार नगर निगम के किसी अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी के यहां लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति की जांच की। पहले उज्जैन स्थित आवास व बाद में इंदौर के निवास पर टीम ने दस्तावेज खंगाले। अपर आयुक्त जैन ने दिखावे के लिए शिवांश एलीजेंस में फ्लैट ले रखा था। उनकी कमाई ही इतनी है कि वे माह में २० बार उज्जैन-इंदौर तक सरकारी गाड़ी से अपडाउन करते हैं। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के बाद उनके निगम स्थित कक्ष का ताला लगवाकर चाबी निगमायुक्त ने खुद मंगवा ली।
जुलाई में था रिटायरमेंट, उम्र बढऩे से लाभ
अपर आयुक्त जैन नगरीय प्रशासन में अ श्रेणी सीएमओ हैं। वे इंदौर ननि में उपायुक्त व कई पालिकाओं में सीएमओ रहे हैं। जुलाई में उनका रिटायरमेंट होना था, लेकिन सरकार द्वारा दो साल अवधि बढ़ाए जाने से अब वे जुलाई २०२० में रिटायर होंगे।
फिलहाल कई अहम विभाग उनके पास
अपर आयुक्त रैवाल का तबादला होने के बाद जैन को निगम के अहम विभागों को प्रभार मिला था। इनमें कॉलोनी सेल, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, उद्यान, पीएम आवास, अमृत मिशन, जोन ४,५ व ६ शामिल हैं। इन संबंधित विभागों की फाइल इनसे होकर गुजरती है। कॉलोनी सेल को छोड़कर अन्य प्रमुख विभाग उन्हें मार्च में ही मिले हैं।
पैतृक निवास पर भी छानीबीन की चर्चा
जैन मूलत: गुना के रहने वाले हैं। लोकायुक्त के गलियारों में चर्चा रही कि एक टीम उनके गुना स्थित पैतृक निवास पर भी जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि लोकायुक्त वहां भी उनसें जुड़ी संपत्तियों की कुंडली जुटा रही है। संभावना है कि वहां भी उन्होंने संपत्ति ले रखी हो।
१० करोड़ी चपरासी, और भी कई उलझे
निगम में इससे पहले १० करोड़ी चपरासी व स्टोर प्रभारी नरेंद्र देशमुख सुर्खियों में आया था। लोकायुक्त टीम के इसकी संपत्ति देख होश उड़ गए थे। वहीं निगम इइ रहे मुकुंद पटेल, दरोगा कैलाश सांगते पर भी आय से अधिक संपत्ति की जांच हुई थी। इनके पास भी बेहिसाब संपत्ति मिली थी।
दो माह में दूसरी कार्रवाई
गत २८ फरवरी को लोकायुक्त टीम ने निगम एई चंद्रकांत शुक्ला को ठेकेदार से बिल पास करने के एवज में १० हजार की रिश्वत लेते जोन १ में ट्रेप किया था। इसके चलते उनसे सभी प्रभार छिनकर उन्हें सॉलिड वेस्ट प्लांट गोंदिया में अटैच किया गया है।
इनका कहना -
अपर आयुक्त जैन के यहां छापे की जानकारी मिली है। लोकायुक्त से इस संबंध में कोई पत्र आने पर जरूरी कार्रवाई करेंगे।
डॉ. विजय कुमार जे., निगमायुक्त