सागेश्वर धाम में प्रात: काल से पूजन अर्चने के लिए पहुंचे लोग
उमरिया. वर्ष 2023 के आगमन को लेकर नगरवासियों में उत्साह देखा गया। लोगों ने अपने अपने ढंग से नया साल का जश्न मनाया। जिला मुख्यालय सहित चंदिया, मानपुर, करकेली, नौरोजाबाद में भी नाये साल के स्वागत में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला मुख्यालय स्थित सागेश्वर धाम में प्रात: काल से ही नगरवासियों का तांता लगा रहा। नये साल के अवसर पर भोलेनाथ की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई तथा परिवार की सुख समृद्धि की कामना की गई। इसी तरह अन्य देवी मंदिरों एवं शिवालयों में भी प्रात: काल से पूजा अर्चना का दौर जारी रहा। इस अवसर पर उमरिया जिले एवं डिंडौरी जिले की सीमा में स्थित अमोल खोह आश्रम धाम में सिद्ध पुरुष श्री श्री 108 श्री भगत गिरी (बच्चू महाराज) जी के सानिध्य में अखंड मानस, भजन, कीर्तन का कार्यक्रम रखा गया था। महाराज जी का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किए, महाराज जी ने श्रद्धालुओं को अपने अमृत मई वाणी से भगवान भोलेनाथ से कामना करते हुए कहा कि सभी के लिए 2023 मंगलमय हो। भगवान भोलेनाथ की आशीर्वाद बना रहे। कार्यक्रम समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें कई जिले से आए हुए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया इसके बाद मेले का आनंद लिया।
भारत को विश्व गुरु बनाना है तो श्रेष्ठ संस्कार अपनाने होंगे
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग मेडिटेशन केंद्र में चल रहे साप्ताहिक गीता ज्ञान यज्ञ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए राजयोगनी ब्रम्हाकुमारी लक्ष्मी बहन ने बताया कि यदि भारत को विश्व गुरु बनाना है तो समस्त भारत वासियों को श्रेष्ठ संस्कारों को अपनाना होगा। विश्व की समस्त आत्माओं के प्रति भाईचारे का भाव जाग्रत करना होगा, तभी दुनिया हमें विश्व गुरु के रूप में स्वीकार करेगी। इसके लिए मेडिटेशन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय हो रहे दुराचार, अत्याचार, पापाचार की सबसे बड़ी वजह हैं हम आँख, कान मुख ज्ञानेन्द्रियों से जो इनपुट दे रहे हैं वह सब निगेटिव ही है। इस वजह से हमारी कर्मेन्द्रियों के द्वारा निगेटिव आउट पुट निकल रहा है। किसी भी दुराचारी व्यक्ति को सजा देकर डरा धमकाकर सुधारा नहीं जा सकता। उसे सुधारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसे आँख, कान मुख के द्वारा वही इनपुट दिया जाए जो हम आउट पुट चाहते हैं। साप्ताहिक सत्संग में ब्रम्हाकुमारी आश्रम के एस कुमार ने अपने आशीर्वचन व्यक्त करते हुए ब्रम्हाकुमारी इश्वरीय विश्व विद्यालय के इस वर्ष की थीम दया ,करुणा को समझाते हुए कहा कि वर्तमान समय अपने स्वभाव में दया और करुणा होना आवश्यक है।