मोहर्रम की पहली तारीख से शेर बनकर स्थानीय लोग इमामबाड़े में लगा रहे हाजिरी
इमामबाड़ा में रात्रि पहर उमरिया वाले बाबा हुजूर की तशरीफ आमद हुई। बाबा हुजूर की सवारी इमामबाड़ा से निकलकर जियारत करने के बाद भारी जन सैलाब के साथ रवाना हुई। जामा मस्जिद में बाबा हुजूर ने जियारत की। चाहने वालों ने उनका दीदार कर मन ही मन अपनी एवं अपने परिवार की खुशहाली के लिए दुआएं की। बाबा हुजूर उमरिया के बखरी व विभिन्न अखाड़ा चौकों में, ताबूतों की जियारत की। अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा।
बाबा हुजूर की सवारी कैम्प अखाड़ा पहुंची जहां पर उन्होंने लोगों को खुदा की इबादत कर सबसे पहले नेक इंसान बनने एवं नफरत करने वालों को ताकीद किया। इसके बाद मस्जिद कैम्प में जाकर लोगों को अपने फैज से नेक राह पर चलने की दुआएं दी। इसके बाद इमामबाड़ा जाकर कयाम किया और सभी इमामबाड़ा के खादिमों को हिदायतें देकर बाबा हुजूर ने सजदा किया। मोहर्रम की पहली तारीख से ही शेर बनकर स्थानीय लोग इमामबाड़े में हाजिरी लगा रहे हैं। यह परंपरा सालों से चली रही है। उसके बाद गली गली ये शेर की टोलियां जाती हैं और घरों के सामने नृत्य करती हंै, उनके साथ लोगों की भीड़ भी चलती है। जिस स्थान से शेर की टोलियां निकलती है सायं काल उसी स्थान पर शेर ठण्डे होते हैं।
दूसरे पहर उठेगी बाजा हुजूर की सवारी
मोहर्रम पर्व की नौवीं 16 जुलाई को जिसे कत्ल की रात भी कहा जाता है दूसरे पहर बाबा हुजूर की सवारी स्थानीय इमामबाड़े से उठेगी, जो विभिन्न मार्गो से होते हुए पुराने पोस्ट पोस्ट आफिस के पास बनाए गए मुरादगाह पहुंचेगी। यहां जिले एवं जिले के बाहर से आए जायरीनों को मुराद बाबा हुजूर द्वारा बांटी जाएगी। विदित हो कि बाबा हुजूर से मुराद लेने के लिए बड़ी संख्या में जिले के बाहर से भी लोग उमरिया पहुंचते हंै और मुराद लेकर मालामाल होते हैं। इसके साथ ही स्थानीय इमाम बाड़े में लोगों द्वारा सिन्नी चढ़ाई जाएगी, यह सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। लंगर का भी विभिन्न जगहों पर आयोजन किया जाता है।