गत वर्ष सूखा राहत का है मामला
उमरिया. शासन द्वारा पीडि़तों को राहत दिलाने विभिन्न योजनाएं चलाई जातीं हैं, किसानों की फसल नष्ट होने पर उन्हे मुआवजा दिलाया जााता है। लेकिन इस प्रक्रिया में संबन्धित अमला निजी हितों के लिए गड़बड़झाला करने से नहीं चूकता है। जिससे कभी कभी हितग्राहियों को समुचित लाभ भी प्राप्त नहीं हो पाता है। हितग्राहीमूलक योजनाओं में अक्सर अपात्रों को लाभ दिलाए जाने की शिकायतें मिलती रहतीं हैं। मानपुर तहसील अंतर्गत नौगवां गांव में धान की फसल सर्वे की फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसकी जांच होने और शिकायतों की पुष्टि होने पर गत दिवस पटवारी राम लाल रौतेल, कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नर्मदा प्रसाद तिवारी तथा कोटवाल कृपाल बैगा के विरुद्ध धोखाधड़ी के आरोप में धारा 420, 409, 34 के तहत पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है। इस मामले में ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत की थी। कलेक्टर ने तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए थे। सर्वे के दौरान पीडि़त किसानों से पैसों की मांग भी की जाती थी और कई पात्र किसानों को अपनी फसल की नुकसानी दर्ज कराने में खासी मशक्त करनी पड़ी।
गत वर्ष सूखा राहत का है मामला
सन् 2017 में जिले में अल्पवृष्टि के कारण जिले को सूखा क्षेत्र घोषित किया गया था और किसानों को आर्थिक रूप से सहायता पहुंचाने के लिए शासन ने उनकी फसल नुकसानी की भरपाई करने के लिए प्रशासन ने इस बात का सर्वे कराया था कि किस किसान की कितनी भूमि में कौन सी फसल बोई है और वह किस हद तक प्रभावित हुई है। इसके लिए संबंधित हलका पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कोटवार का दल बनाया गया था। यह प्रक्रिया पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में की गई थी और रिपोर्ट शामिल कर दिए जाने के बाद किसानों को नष्ट हुई फसल का मुआवजा दिया गया था।
तहसीलदार को सौंपी जांच
कलेक्टर ने प्रथम दृष्टया मामले का अवलोकन किया इसके बाद उन्हे मामला संदेहास्पद प्रतीत होने पर उन्होने तहसीलदार मानपुर को जांच के निर्देश दिए और प्रकरण सौंप दिया। तहसीलदार ने मामले की जांच करनी शुरू की तो उनके समक्ष शिकायतों की पुष्टि होती गई। जांच समाप्त करने के पश्चात तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत कर दी और फिर कलेक्टर ने जिम्मेदार अमले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए। जिस पर तहसीलदार ने तीन लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करा दिया।