<!-- wp:paragraph --> <p>जिले के मानपुर विकासखंड में तहसील गठन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमरपुर को तहसील बनाए जाने की मांग के बीच चिल्हारी क्षेत्र के लोगों ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि चिल्हारी लंबे समय से प्रशासनिक एवं व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, इसलिए तहसील का दर्जा चिल्हारी को मिलना चाहिए।</p> <!-- /wp:paragraph -->

जिले के मानपुर विकासखंड में तहसील गठन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमरपुर को तहसील बनाए जाने की मांग के बीच चिल्हारी क्षेत्र के लोगों ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि चिल्हारी लंबे समय से प्रशासनिक एवं व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, इसलिए तहसील का दर्जा चिल्हारी को मिलना चाहिए।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि चिल्हारी और अमरपुर के बीच का विवाद आपसी सहमति से सुलझा लो, फिर मैं तहसील बना दूंगा। वर्षों बीत जाने के बाद भी तहसील गठन का मामला लंबित है। क्षेत्र की जनता का कहना है कि चिल्हारी पूर्व से ही राजस्व निरीक्षक मंडल मुख्यालय रहा है तथा आसपास के दर्जनों गांवों का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, इसलिए प्रशासनिक दृष्टि से चिल्हारी तहसील के लिए उपयुक्त स्थान है।
पूर्व में चिल्हारी में तहसील कार्यालय की प्रक्रिया शुरू हुई थी और तहसीलदार का बैठना भी प्रारंभ हो गया था, जिससे लोगों में उम्मीद जगी थी। अब यदि किसी अन्य स्थान को प्राथमिकता दी जाती है तो यह चिल्हारी क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग और अपेक्षाओं के विपरीत होगा। कुछ दिन पूर्व विधायक ने राजस्व मंत्री को पत्र सौंप कर अमरपुर को तहसील बनाने की मांग की। ऐसे में दोनों क्षेत्रों के बीच तहसील मुख्यालय को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन को सभी पहलुओं का अध्ययन कर जनहित में निर्णय लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
उमरिया जिले के चिल्हारी के लोगों को कहना है कि यहां से तहसील मुख्याल काफी दूर होने के कारण ग्रामीण वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिसके कारण उन्हें पैसे तो खर्च करने ही पड़ते हैं, साथ समय भी खराब होता है। अगर चिल्हारी को तहसील का दर्जा दे दिया जाए लोगों की काफी हद समस्या हल हो जाएगी और उन्हें अपने काम के लिए यहां-वहां भटकना नहीं पड़ेगा। इसके साथ जिला मुख्यालय से भी लोड कम हो जाएगा।
चिल्हारी को तहसील बनाने की मांग वर्षों पुरानी है। इसके लिए क्षेत्र की जनता ने पूर्व में धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन भी किया था। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो चिल्हारी, इंदवार एवं आसपास के क्षेत्रों में आंदोलन की स्थिति बन सकती है। जनपद सदस्य विजय द्विवेदी ने कहा कि चिल्हारी तहसील की मांग नई नहीं है। वर्षों से क्षेत्रवासी इसके लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। यहां से आसपास के दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और अधिकांश राजस्व एवं व्यापारिक गतिविधियां चिल्हारी केंद्रित हैं। जनता की सुविधा को देखते हुए चिल्हारी को तहसील बनाया जाना चाहिए। युवा समाजसेवी प्रशांत सोनी ने कहा कि पूर्व में चिल्हारी में तहसील संबंधी व्यवस्थाएं शुरू होने से क्षेत्र की जनता में उम्मीद जगी थी। आज भी लोगों की अपेक्षा है कि चिल्हारी को पूर्ण तहसील का दर्जा मिले। पूर्व जनपद सदस्य उर्मिला गुप्ता ने कहा कि चिल्हारी को तहसील बनाए जाने से क्षेत्र के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। शासन को जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लेना चाहिए।