पॉलिटेक्निक कॉलेज की समस्या
उमरिया. स्थानीय पॉलीटेक्निक कॉलेज का अपना नया भवन बनने के बावजूद यहां समस्याओं से छुटकारा नही मिल रहा है। नगर में कॉलेज का संचालन करीब आठ वर्षों से हो रहा है। पूर्व में यह किराए के भवन में चल रहा था, लेकिन दो वर्षो पूर्व इसका अपना भवन बन गया। कालेज में इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल दो विभाग लगते हैं और यहां लगभग 350 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। कॉलेज में विद्यार्थियों के अध्ययन सुविधा के लिए लैब, वर्कशाप तथा खेल मैदान की कमी है। छात्रों को लैब के लिए अन्य शहरों के कालेजों की दौड़ लगानी पड़ती है। इसके अलावा कॉलेज का भवन शहर से करीब सात किमी दूर है। यहां बस सुविधा भी नहीं है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए ट्रेडवार लैब की स्थापना होनी चाहिए, जहां छात्र-छात्राओं को प्रैक्टिल करने और विषय की व्यावहारिक जानकारी के लिए पढ़ाई करनी अनिवार्य रहती है। इसकी भी विधिवत परीक्षा होती है और लैब कार्य बिना पॉलीटेक्निक की पढ़ाई पूरी भी नहीं मानी जाती है, लेकिन यहां अभी तक लैब नही है, इसके अलावा फिजिक्स, केमिस्ट्री प्रयोग के लिए भी लैब नहीं है। इंजीनियरिगं कार्यशाला में मशीनों का अभाव है। इसलिए कार्यशाला नहीं लगती। इन कार्यों के लिए विद्यार्थियों को कटनी, जबलपुर व शहडोल के कालेजों में विजिट कराया जाता है। छात्रों का कहना है कि पूरा कोर्स विजिट के भरोसे पूरा नहीं हो पाता है। विजिट में पाठ्यक्रम की खास जानकारियंा ही मिल पातीं हैं। आने जाने में भी समय बर्बाद होता है। इसके अलावा विद्यार्थियों के फिजिकल वर्क के लिए खेेेले मदान नहीं है। इस कारण विद्यार्थीगण खेले गतिविाधयों में भाग नहीं ले पाते हैं। जबकि इंजीनियरिंग के जटिल पाठ्यक्रम में लगातार अध्ययन करने के बाद उन्हे स्वस्थ्य मनोरंजन की आवश्यकता होती है। बताया गया कि मैदान का निर्माण यहां भवन के साथ प्रस्तावित था, लेकिन मैदान अभी तक बनाया नहीं गया है। कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त खेल सामग्रियां भी अभी नहीं मगाई गईं हैं।
इनका कहना है
लैब तथा वर्कशाप व्यवस्था के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं, इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। मैदान के लिए भी व्यवस्था की जा रहीं है।
अतुल वाजपेयी, प्राचार्य, पॉलिटेक्निक कॉलेज, उमरिया