कुल तीन डॉक्टर कार्यरत, कैसे हो आयुर्वेद उपचार
उमरिया. जिले भर में भले ही बीमारियों का प्रकोप फैल रहा हो, लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा का लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले के ग्रामीण अंचलों में कुल 11 औषधालय संचालित हैं और इनमें महीनों से दवाएं नहीं हैं। दो माह पूर्व मार्च के प्रथम सप्ताह में जिला आयुर्वेद अधिकारी ने मप्र शासन आयुष विभाग से दवाएं मंगाई थी, लेकिन अभी तक यहां दवाओं की सप्लाई नहीं की गई। इसके अलावा डॉक्टरों की संख्या कुल तीन है। अधिकांश औषधालय कंपाउण्डरों के भरोसे चल रहे हैं। जिन औषधालयों में डॉक्टर नहीं वहां के ग्रामीणों का रोग परीक्षण नहीं हो पाता है और उन्हे रोग के अनुसार दवाएं नहीं मिल पातीं हैं। इस कारण ग्रामीण इन औषधालयों में जाना भी पसंद नहीं करते हैं। दवा और डॉक्टरों के बिना आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अपनी उपयोगिता खो रही है।
जिले में बुखार और पेट की बीमारियों से संबंधित जो दवाएं आयुर्वेद में अत्यंत आवश्यक हैं उनमे सुदर्शन चूर्ण, कुटजघन बटी, शंख बटी, कालमेघ, लोहासव, अविपत्तिकर, पंचसकार चूर्ण, हिंगवाष्टक, कनकासव, अर्जुनारिष्ट आदि करीब 27 प्रकार की दवाएं उपयोगी होती हैं, लेकिन इनमें से कोई दवा औषधालय में नहीं है। इन सभी दवाओं का मांग पत्र भेजा गया था, लेकिन अभी तक न तो दवाएं भेजी गईं और न कोई मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। स्थानीय स्तर पर दवा क्रय करने न तो विभाग को अधिकार दिया गया है और न उसके पास बजट रहता है। इन दवाओं के बिना अस्पताल का संचालन कर पाना कठिन हो रहा है।
सप्ताह में दो दिन डॉक्टरों की ड्यूटी
11 औषधालयों में कुल तीन औषधालय बिलासपुर, रहठा, रोहनियां में डाक्टर पदस्थ हैं, लेकिन चिल्हारी, बलौढ़, रायपुर, चेचरिया, जरहा, अखड़ार, निगहरी, कौडिय़ा में डाक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इन डॉक्टर विहीन आठ केन्द्रों में सेवारत तीन डॉक्टरों की ड्यूटी सप्ताह में दो दिन लगाई गई है। ताकि यह डॉक्टर औषधालयों में विजिट कर रोगियों का इलाज करें और रोगियों को लाभ हो, लेकिन स्थिति यह है कि डॉक्टर दो दिन भी विजिट नहीं करते और अपना औषधालय नही छोड़ते हैं। आठ औषधालय लगभग बंद से रहते हैं। भूले भटके जब कोई ग्रामीण यहां पहुंच गया और दवाएं उपलब्ध रहीं तो कंपाउण्डर सर्दी जुखाम व पेट आदि की दवा दे देता है।
तीन किराए में शेष के भवन जर्जर
11 औषधालयों में स्थिति यह है कि आठ के भवन वर्षों पुराने और अत्यंत जर्जर हैं। यहां रोगियों के न तो बैठने की जगह है और न उनके पेयजल व निस्तार आदि की सुविधाएं हैं। औषधालयों में शौचालय और पेयजल सुविधा नही है। अधिकांश औषधालय एक या दो कमरों में संचालित हो रहे हैं। जहां दवा रखने के लिए आलमारी रखने तथा टेबिल कुर्सी लगाने के लिए जगह नहीं है। तीन औषधालय भवन विहीन हैं जो किराए के मकानों में चल रहे हैं। जिला स्तर पर न तो आयुष विंग स्थापित हुई और न जिला अस्पताल खोली गई। इन स्थितियों में जिले की आयुर्वेद चिकित्सा चल रही है।
भेजा गया है मांग-पत्र
दवाओं के लिए मांगपत्र भेजा गया है और पत्राचार भी किया गया है, लेकिन अभी तक दवाएं उपलब्ध नही कराई गईं हैं। स्थितियों के संदर्भ में शासन का ध्यान आकृष्ट कराया जाता है।
डॉ. आरबी द्विवेदी, जिला आयुष अधीक्षक, उमरिया