
उन्नाव : कभी जिस बेटे को पिता ने पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी बेटे ने शनिवार की रात ऐसी वारदात को अंजाम दिया जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। उन्नाव के औरास क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता और मंडल अध्यक्ष प्रमोद रावत उर्फ रेवती (58) की उनके ही बड़े बेटे सोनेलाल ने कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी। हत्या के पीछे सिर्फ संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि एक टूटते परिवार की लंबी कहानी, बिखरे रिश्तों का दर्द और वर्षों से भीतर पल रही नाराजगी भी सामने आ रही है।
गांव उटरा डकौली के मजरा चमारन खेड़ में रहने वाले प्रमोद रावत खेती-किसानी के साथ भाजपा संगठन में सक्रिय थे। उन्होंने गांव से करीब 600 मीटर दूर अपने बाग में एक शनि मंदिर बनवाया था। हर शनिवार की तरह वह मंदिर में दीपक जलाने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वहां उनका अपना बेटा मौत बनकर इंतजार कर रहा है।
परिजनों के मुताबिक, सोनेलाल की शादी करीब 20 साल पहले हुई थी। उसके दो बच्चे हैं। पारिवारिक विवादों के चलते उसकी पत्नी किशाना करीब सात साल पहले उसे छोड़कर मायके चली गई थी। लंबे समय तक विवाद सुलझाने की कोशिशें होती रहीं, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार छह महीने पहले दोनों का संबंध विच्छेद हो गया।
यही वह घटना थी जिसने सोनेलाल के मन में गहरी कड़वाहट भर दी। परिवार का कहना है कि वह अपनी शादी टूटने के लिए माता-पिता को जिम्मेदार मानता था। उसे लगता था कि अगर माता-पिता चाहते तो उसका घर बच सकता था।
मां देशकुमारी बताती हैं कि सोनेलाल अक्सर पिता से जमीन के बंटवारे या कुछ जमीन बेचकर उसे पैसे देने की मांग करता था ताकि वह कोई काम-धंधा शुरू कर सके। लेकिन प्रमोद रावत का कहना था कि उनके जीवित रहते संपत्ति का बंटवारा नहीं होगा और उनकी मौत के बाद चारों बेटों में बराबर हिस्सेदारी होगी।
यही बात दोनों के बीच लगातार तनाव का कारण बनती गई। मां के मुताबिक, बेटा अक्सर ताना देता था कि परिवार को उसकी और उसके बच्चों की कोई चिंता नहीं है। वह खुद को उपेक्षित महसूस करता था और धीरे-धीरे उसका गुस्सा बढ़ता चला गया।
गांव वालों के अनुसार, प्रमोद रावत चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हों, शनिवार की शाम मंदिर में दीपक जलाने जरूर जाते थे। सोनेलाल यह बात अच्छी तरह जानता था। पुलिस जांच में भी सामने आया है कि उसने इसी दिन और इसी समय को चुनकर हत्या की योजना बनाई।
शनिवार रात करीब आठ बजे जैसे ही प्रमोद रावत मंदिर पहुंचे और पूजा की तैयारी में झुके, सोनेलाल ने कुल्हाड़ी से उन पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। गर्दन, जबड़े और चेहरे पर इतने हमले किए गए कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मंदिर के पास मौजूद एक युवक ने चीख-पुकार सुनकर बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उस पर भी हमला करने का प्रयास किया। जान बचाकर भागे युवक ने गांव पहुंचकर परिजनों और ग्रामीणों को सूचना दी। देखते ही देखते गांव में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों का कहना है कि हत्या के बाद सोनेलाल अपनी मां की तलाश में घर भी पहुंचा था। आशंका है कि वह मां को भी नुकसान पहुंचाना चाहता था, लेकिन तब तक वह घटनास्थल पर पहुंच चुकी थीं।
वारदात को अंजाम देने के बाद सोनेलाल फरार नहीं हुआ। वह खून से सनी कुल्हाड़ी लेकर सीधे औरास थाने पहुंचा और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस हिरासत में उसने कहा कि पिता उसकी कोई बात नहीं सुनते थे। पत्नी से अलगाव के बाद वह दूसरी शादी कराना चाहता था, लेकिन पिता इसके लिए भी तैयार नहीं थे। जमीन बेचने या पैसे देने की मांग भी ठुकरा दी गई थी।