
Air Marshal Jitendra Mishra Ram Mandir Trust CEO: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आखिरकार अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल गया है। आज यानी 2 सितंबर 2026 को ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास मणिरामदास छावनी में हुई अहम बैठक में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया।
बैठक में 3 नए ट्रस्टी अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और निर्मला यादव भी शामिल किए गए। बैठक में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि समेत कई ट्रस्टी मौजूद रहे। ये नियुक्तियां मंदिर के दान में कथित गबन को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुई हैं, जिसके चलते जून में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।
CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश साफ दिखती है। इसके लिए 3 सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े शामिल थे। देशभर से 5,585 आवेदन मिले, जिनकी कई चरणों की छंटनी के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया, और इनमें से 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाकर साक्षात्कार भी लिए गए थे। कमेटी ने अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट अध्यक्ष को सौंपी, जिसके आधार पर बैठक में मुहर लगी।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया और अपने करियर में 18 से अधिक प्रकार के विमान उड़ाए, साथ ही 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया। वे एक क्वालिफाइड टेस्ट पायलट और अमेरिका की एयर यूनिवर्सिटी से स्नातक भी हैं। करीब 39 साल की सेवा के बाद वे 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए, इससे पहले वे वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके थे, जिसका जिम्मा उन्होंने जनवरी 2025 में संभाला था।
जितेंद्र जितेंद्र मिश्रा की सबसे चर्चित भूमिका पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रही, जब वे पश्चिमी वायु कमान के मुखिया के तौर पर फ्रंटलाइन ऑपरेशन की कमान संभाल रहे थे। हाल ही में एक पॉडकास्ट में उन्होंने खुद इस अभियान के कई पहलू साझा किए। जिनमें सबसे चर्चित रहा सरगोधा से भेजे गए पाकिस्तानी AWACS विमान को S-400 प्रणाली द्वारा करीब 314 किलोमीटर की दूरी से मार गिराए जाने का किस्सा, जिसे उन्होंने जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल की एक असाधारण लंबी दूरी की कार्रवाई बताया। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेनाओं पर इस अभियान में कोई सैन्य प्रतिबंध नहीं था और भारत पाकिस्तान के भीतर कहीं भी हमला करने में सक्षम था, जबकि पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई में असमर्थ रहा। इस भूमिका के लिए उन्हें ऑपरेशन सिंदूर में योगदान के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त वे अपने लंबे सैन्य करियर में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से भी सम्मानित हो चुके हैं।