प्रयागराज के सोरांव में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने कोल्ड स्टोरेज की खराब व्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इस घटना के बाद शहर से लेकर गांव तक फैले कोल्ड स्टोरेज और कारखानों से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अपने परिवार के साथ रहते हैं लोग […]
प्रयागराज के सोरांव में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने कोल्ड स्टोरेज की खराब व्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इस घटना के बाद शहर से लेकर गांव तक फैले कोल्ड स्टोरेज और कारखानों से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शहर के मुंडेरा, लूकरगंज, सिविल लाइंस, तेलियरगंज, कीडगंज, नैनी समेत कई इलाकों में बड़े-बड़े कोल्ड स्टोरेज और गोदाम बने हुए हैं। इन जगहों पर बड़े स्तर पर सामान रखा जाता है, जबकि आसपास ही बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं। ऐसे में किसी भी हादसे की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा मुट्ठीगंज, कीडगंज, खुल्दाबाद और कोतवाली जैसे इलाकों में कई छोटे-बड़े कारखाने भी घनी आबादी के बीच चल रहे हैं। यहां लगातार औद्योगिक काम होता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। यमुनापार और गंगापार क्षेत्रों में भी कई कोल्ड स्टोरेज और फैक्ट्रियां हैं, जिनमें से कुछ बिना अनुमति के भी संचालित हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 50 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनकी नियमित जांच और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। लेकिन कई मामलों में नियमों का सही पालन नहीं होता और अधिकारी भी कभी-कभी ही सक्रिय नजर आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा उपकरणों की जांच और जरूरी व्यवस्थाओं की अनदेखी के कारण ही इस तरह के हादसे होते हैं। ऐसे में अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़े हादसे होने का खतरा बना रहेगा।