Election Results UP Assembly Elections 2022 Results पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी काफी उत्साहित थी। समाजवादी पार्टी को यह लग रहा था कि पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी को वोट दे सकते हैं। लेकिन नतीजे किसी दूसरी ओर ही इशारा कर रहे हैं। बताते चलें अखिलेश यादव द्वारा पुरानी पेंशन बहाली को लेकर किए गए वादे का कोई खास असर सरकारी कर्मचारियों पर नहीं पड़ा है। पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर यदि सरकार कर्मचारी एकजुट होते तो नतीजे शायद कुछ और होते।
UP Assembly Elections Result 2022: प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर काउंटिंग चल रही है जो रुझान सामने आ रहे हैं उसमें भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से सरकार बना रही है। अभी तक के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी 263 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी 124 सीटों पर आगे चल रही है। अब तक के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी फिर से उत्तर प्रदेश में सरकार बना सकती हैं। वही, बहुजन समाज पार्टी को 6, कांग्रेस को तीन और अन्य को तीन सीटें मिलती हुई नजर आ रही हैं।
सरकारी कर्मचारियों ने अखिलेश को दिया धोखा
मतगणना के दौरान जिस तरीके के नतीजे निकल के सामने आ रहे हैं ऐसे में कहा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी की ओर से सरकारी कर्मचारियों को लेकर किए गए पुरानी पेंशन बहाली के वादे का मुद्दा काम नहीं आया है। सरकारी कर्मचारियों ने पेंशन के मुद्दे पर अखिलेश यादव को धोखा दे दिया। बता0ते चलें उत्तर प्रदेश में 25 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी हैं जो सीधे तौर पर पुरानी पेंशन से प्रभावित होते हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को अपने पक्ष में लाने के लिए अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन की बहाली का वादा किया था। लेकिन कर्मचारियों ने अखिलेश यादव के इस वादे को नकार दिया है और पक्ष भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
नतीजे कुछ और होते
पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी काफी उत्साहित थी। समाजवादी पार्टी को यह लग रहा था कि पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी को वोट दे सकते हैं। लेकिन नतीजे किसी दूसरी ओर ही इशारा कर रहे हैं। बताते चलें अखिलेश यादव द्वारा पुरानी पेंशन बहाली को लेकर किए गए वादे का कोई खास असर सरकारी कर्मचारियों पर नहीं पड़ा है। पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर यदि सरकार कर्मचारी एकजुट होते तो नतीजे शायद कुछ और होते।