Saharanpur couple suicide आजकल कमेटी डालना आम बात हो गई है लेकिन...
( Saharanpur couple suicide ) सहारनपुर के एक युवा सर्राफ ने अपनी पत्नी के साथ गंगहर में कूदकर आत्महत्या कर ली। गंगनहर में छलांग लगाने से पहले इन्होंने सेल्फी ली और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए सभी को बताया कि हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा है हम कर्ज में डूब चुके हैं और इस दुनिया को छोड़कर जा रहे हैं। हमें किसी पर भरोसा नहीं रहा हमारे बच्चों को उनकी नानी के घर छोड़ दिया जाए। इस घटना ने ना सिर्फ सहारनपुर ( saharanpur ) शहर बल्कि पूरे देश के लोगों को सन्न कर दिया। आईए जानते हैं कि कैसे एक सर्राफ परिवार करोड़ों का कर्जदार बन गया।
आजकल किट्टी पार्टी और कमेटी डालना ट्रेंड में है। यह ट्रेंड इतना बढ़ रहा है कि अब इसे स्टेटस सिंबल की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। आज हम आपको बताते हैं कि इस दंपति के सुसाइड करने और इनसे जुड़े सैकड़ों परिवारों का पैसा डूब जाने के पीछे एक बड़ी वजह ये कमेटियां और किट्टी पार्टी ही हैं। सौरभ कमेटी लिया करता था। इसके पास लाखों-लाखों रुपये प्रतिमाह की मेम्बरशिप वाली कमेटियां भी थी। कमेटी में इन दिनों एक नया ट्रेंड चला है कि दस लोगों का पैसा इकट्ठा किया जाता है। फिर महंगे होटल में पार्टी होती है। यहां लक्की ड्रा निकाला जाता है। इस लक्की ड्रा में जिसका भी नाम निकलता है उसे सभी दस लोगों का पैसा इकट्ठा करके दे दिया जाता है। अब यहां एक नया तरीका ये निकाला गया है कि इस पैसे को कमेटी का हैड जो सर्राफ होता है वो अपने पास रखेगा और इतनी ही कीमत का सोना या सोने ( Gold ) के गहने लक्की ड्रा निकलने वाले मेम्बर को देगा। लेकिन ये सोना कितना शुद्ध है इसकी कोई गारंटी नहीं होती। लोगों को ये समझाया जाता है कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब अपने खुद के खर्चे पूरे नहीं हो रहे ऐसे में आप बच्चों के लिए गहने नहीं खरीद पाएंगे और यही एक तरीका है जिसमें धीरे-धीरे आप गोल्ड जोड़ लेंगे। इस बात पर भरोसा करके लोग जुड़ जाते हैं। सौरभ बब्बर के केस में भी ऐसे कई मामले सामने आये हैं जिनमें मध्यम वर्गीय परिवारों ने अपनी लगभग सारी कमाई सौरभ को दे दी और अब सौरभ इस दुनिया से ही चला गया। सौरभ ने लोगों का पैसा शेयर मार्केट में लगाया तो उसे घाटा हो गया इसके बाद उसने पैसा ब्याज पर लिया और ये ब्याज इतना महंगा था कि वो इस दल-दल में घुसता चला गया और करोड़ों का कर्जदार बन गया।
एक जिम्मेदार मीडिया संस्थान के होने के नाते पहले तो हम ऐसी किसी भी किट्टी पार्टी या कमेटी का समर्थन नहीं करते जो महंगे होटलों में पार्टी करने और पश्चिम देशों के कच्लर को बढ़ावा देने वाली हो। बावजूद इसके अगर आप कोई कमेटी डाल रहे हैं तो उस कमेटी में शामिल लोगों की पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट जरूर लें। ये भी आवश्यक है कि आप कमेटी में शामिल सभी मेम्बर को अच्छी तरह से जानते हों। एक सर्टिफिकेट कमेटी के मुख्य मेंबर से जरूर लें, जिसमें मुख्य मेंबर आपको भरोसा दिलाए कि अगर कोई भी मेंबर भागता है या डिफाल्टर होता हो तो पैसे की पूरी जिम्मेदारी उसकी होगी। इतना ही नहीं कमेटी में जमा किए गए पैसों के बदले में आपको जो भी गिफ्ट या गहने या गोल्ड ( Gold ) का सामान दिया जा रहा है उसकी लैब में जांच जरूर करा लें और पता कर लें कि जो सामान आपको गोल्ड का बताकर दिया जा रहा है वो वास्तव में गोल्ड है भी या नहीं। दरअसल पिछले दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कमेटी में दिया गया गोल्ड मिलावटी गोल्ड निकला।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवाण का कहना है कि कमेटी लोग अपने स्तर से डालते हैं। पहले इसकी जानकारी किसी को नहीं देते और ना ही ये पता करने की कोशिश करते हैं कि उनकी कमेटी में कौन-कौन लोग हैं। बाद में जब ये कमेटियां डिफाल्टर हो जाती हैं तो पुलिस से शिकायत की जाती है। ऐसे कई मामले में सामने आ चुके हैं। लोगों को चाहिए कि जागरूक हों।