16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सैय्यद दरगाह ध्वस्तीकरण की सुनवाई शुरू, दस्तावेज जमा करने के निर्देश, सीएम ऑफिस से आई थी शिकायत

Mazar on forest department land: इटावा में वन विभाग की जमीन पर मजार होने की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी। सीएम कार्यालय से जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

2 min read
Google source verification
मजार पर लगाई गई धवस्तीकरण की नोटिस, फोटो सोर्स- पत्रिका

फोटो सोर्स- पत्रिका

Hearing on demolition notice begins. इटावा में बीयर क्षेत्र में सैय्यद दरगाह विभाग की जमीन पर बनाया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की गई थी। जिला प्रशासन के पास मुख्यमंत्री के कार्यालय से इस संबंध में पत्र आया। मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। इस संबंध में राजस्व विभाग और अल्पसंख्यक विभाग को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद वन विभाग ने मजार को वन क्षेत्र की भूमि में होना बताया। इसके बाद मजार पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा दिया गया, जिसकी सुनवाई सामाजिक वानिकी न्यायालय में की गई। अगली तारीख 20 नवंबर को दी गई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची थी शिकायत

उत्तर प्रदेश के इटावा में सामाजिक भवन की न्यायालय में आज बिहार क्षेत्र में स्थित सैयद दरगाह मामले की सुनवाई की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने मजार संचालक को 20 फरवरी को मजार से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। वन विभाग ने बीते 23 जनवरी को मजार पर नोटिस चस्पा किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि मजार वन विभाग की जमीन पर बनाया गया है।

मजार में लोगों के आने-जाने पर रोक

इसके साथ ही मजार पर लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई थी, जिस पर लोगों ने नाराजगी व्यक्त की थी। केयरटेकर के बीमार होने के बाद वकील नदीम ने चिकित्सा प्रमाण पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। वकील की तरफ से अदालत में मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। अदालत में गूगल मैप का नक्शा भी पेश किया गया। जिसमें मजार दिखाई पड़ रहा है।

अगली सुनवाई 20 फरवरी को

इधर मजार में इबादत की इजाजत न मिलने पर मुस्लिम पक्ष में नाराजगी भी है। उन्होंने मजार पर इबादत करने की इजाजत मांगी है।‌ बीते दिनों शबे बरात के अवसर पर वन विभाग ने किसी प्रकार का कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी थी। बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई थी। अब 20 तारीख को होने वाली सुनवाई पर सब की निगाहें हैं।