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अखिलेश यादव ने कहा- मुख्यमंत्री बिष्ट ने आईने में अपने आपको देखकर विधानसभा में भाषण दिया

Akhilesh Yadav gave statement on Chief Minister Yogi Adityanath: इटावा में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर एक बार फिर बड़ा हमला किया है। उन्होंने ने उनके पहनावे और कान में छेद को लेकर भी टिप्पणी की है।

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सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, फोटो सोर्स- 'X' समाजवादी पार्टी

फोटो सोर्स- 'X' समाजवादी पार्टी

Akhilesh Yadav statement on Chief Minister Yogi Adityanath: इटावा में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर एक बार फिर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आईना देखकर विधानसभा में भाषण देने के लिए आए होंगे और आईना कभी झूठ नहीं बोलता है, उसने सच्चाई बता दी होगी कि केवल पहनावे से कोई बाबा नहीं हो सकता है। इस मौके पर उन्होंने गीता और गुरु नानक का भी उल्लेख किया। बोले यमुना और चंबल में ऐसे साधु बहुत मिल जाएंगे, क्या सबका सर्टिफिकेट बनवाया जाएगा?

आईना देखकर पता चला होगा बाबा नहीं

उत्तर प्रदेश के इटावा में अखिलेश यादव ने योगी साधु, संत और शंकराचार्य पर एक बार फिर बयान दिया है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आईना झूठ नहीं बोलता है। ‌एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि सच है, जब वह (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) आईना देखे होंगे, तो उन्हें लगा होगा "वह बाबा नहीं है।"

किस संस्था ने उन्हें योगी का प्रमाण पत्र दिया?

अखिलेश यादव ने कहा कि मुझे तो लगता है कि मुख्यमंत्री ने आईना देखकर विधानसभा में भाषण देने के लिए गए होंगे और आईने ने सच्चाई बता दी होगी कि केवल पहनावे से कोई बाबा या संत नहीं हो सकता है। कान में छेद करवाने से भी कोई बाबा नहीं बनता है। गीता में भी यही बातें लिखी हैं। गुरु नानक ने भी यही कहा है कि कान छिदवा लेने से कोई योगी नहीं बन जाता है। दूसरे से सर्टिफिकेट मांगने वाले अपना सर्टिफिकेट दिखाएं कि किस संस्था ने उन्हें योगी का प्रमाण पत्र दिया है?

मुख्यमंत्री के पास कोई काम नहीं बचा

चीफ मिनिस्टर विष्ट के पास कोई काम नहीं बचा है तो वे जनता को धोखा देने के लिए निकले हैं। उनकी (मुख्यमंत्री) भाषा पर शंकराचार्य ने कहा है कि ऐसी भाषा गुंडों की भी नहीं होती है। उन्होंने शंकराचार्य का अपमान किया है। हमारे यहां परंपरा है कि गेरुआ वस्त्र धारण करके साधु बन जाओ। अपने इटावा में भी ऐसे बहुत साधु हैं। यमुना और चंबल के किनारे भी ऐसे बहुत साधु संत मिल जाएंगे। क्या सभी के लिए सर्टिफिकेट बनवाए जाएंगे?