फरवरी का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ है लेकिन दोपहर की तेज धूप ने लोगों को अप्रैल-मई जैसी गर्मी का एहसास कराना शुरू कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2026 में उत्तर प्रदेश में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च के पहले हफ्ते से ही गर्मी […]
फरवरी का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ है लेकिन दोपहर की तेज धूप ने लोगों को अप्रैल-मई जैसी गर्मी का एहसास कराना शुरू कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2026 में उत्तर प्रदेश में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च के पहले हफ्ते से ही गर्मी की शुरुआत हो जाएगी। मार्च के अंत तक कई जिलों में तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं अप्रैल में तापमान 40 डिग्री के आसपास और मई-जून में 45 डिग्री से ऊपर जाने की संभावना है।
भारतीय मौसम विभाग का भी कहना है कि इस बार हीटवेव यानी लू के दिन ज्यादा और लंबे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर एल नीनो की स्थिति बनी रहती है तो गर्मी और भी ज्यादा बढ़ सकती है।
मौसम के पिछले रिकॉर्ड बताते हैं कि बुंदेलखंड क्षेत्र में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है। खासकर बांदा जिला कई बार प्रदेश का सबसे गर्म जिला रह चुका है। यहां सूखा मौसम, कम पेड़-पौधे और राजस्थान की तरफ से आने वाली गर्म हवाओं के कारण तापमान 47 डिग्री तक पहुंच चुका है।
इसके अलावा झांसी भी गर्मी के मामले में काफी संवेदनशील जिला माना जाता है। यहां मई-जून में तापमान 45 डिग्री पार होना आम बात है। फिलहाल फरवरी के अंत में यहां अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री है, जो मार्च की शुरुआत में 32 डिग्री तक पहुंच सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून के मध्य में कहीं-कहीं आंधी, गरज और हल्की बारिश हो सकती है, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। लेकिन कुल मिलाकर इस साल गर्मी सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गर्मी सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि बदलती जलवायु का संकेत भी है। बुंदेलखंड से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक इस बार गर्मी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।