
वाराणसी. पांच राज्यों के चुनाव परिणाम से बीजेपी में भविष्य के नेता तय होंगे। इन राज्यों में मतदान हो चुका है और विभिन्न एक्जिट पोल का अपना-अपना आकंलन है और चुनाव परिणाम के बाद तस्वीर साफ हो जायेगी। बीजेपी में सबसे बड़े नेता पीएम नरेन्द्र मोदी व फिर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह है। राज्यों के चुनाव परिणाम तय करेगा कि नया बड़ा नेता कौन है। सीएम योगी आदित्यनाथ की भले ही चुनावी रैली में सबसे अधिक मांग थी लेकिन अभी उन्हें पार्टी में लंबा सफर तय करना है।
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मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बीच बड़ा नेता बनने की लड़ाई है। दोनों ही राज्यों में बीजेपी की 15-15 साल से सरकार है। जब शिवराज सिंह चौहान व रमन सिंह अपने-अपने राज्य में सीएम बने थे तब पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर नहीं थी। वर्ष 2014 से पहले दोनों राज्यों के सीएम ने अपने बल पर तीन चुनाव जीते हैं। चौथा चुनाव जो जीतेगा वह बड़ा नेता बन जायेगा। यदि यह नेता चुनाव हार जाते हैं तो बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। फिलहाल चुनाव परिणाम तय करेगा कि किस नेता का कद बढऩे वाला है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के बाद किसके हाथ में रहेगी बीजेपी की कमान
बीजेपी के पास पीएम नरेन्द्र मोदी जैसा बड़ा नेता है जिनकी लहर ने पार्टी को कई राज्यों में बहुमत दिलाया है। लोकसभा चुनाव 2019 में एक बार फिर पीएम मोदी की परीक्षा होगी। यदि चुनाव बीजेपी जीत जाती है तो पीएम नरेन्द्र मोदी ही सरकार चलायेंगे। बड़ा सवाल यह है कि पीएम नरेन्द्र मोदी के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद किस नेता को पार्टी की कमान मिल सकती है। यूपी की कमान सीएम योगी आदित्यनाथ को देकर बीजेपी का एक बड़ा तबका उन्हें पीएम मोदी का उत्तराधिकारी बताने में जुटा हुआ है जबकि बीजेपी के पास रमन सिंह व शिवराज चौहान जैसे दो बड़े नेता हैं जिन्होंने अपने बल पर 15 साल तक राज्यों पर शासन किया है। चुनाव परिणाम तय कर देगा कि किस नेता की पार्टी में पकड़ मजबूत होने वाली है।
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चुनाव हारे तो उठाना होगा नुकसान
दिल्ली में एक समय कांग्रेस की पहचान शीला दीक्षित हुआ करती थी। शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने दिल्ली पर 15 साल तक राज किया था लेकिन जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनी है जब से शीला दीक्षित की राजनीति में सक्रियता कम हो गयी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह व एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान के पास अभी लंबा समय है इसके बाद भी वह चुनाव हारते हैं तो राजनीति में पुरानी जगह पाना उनके लिए बेहद कठिन होगा।
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