वाराणसी

जिस पार्टी के लिए मुलायम सिंह यादव के परिवार में मची थी कलह, क्या अखिलेश यादव करेंगे बाहुबली के भाई का प्रचार

लोकसभा चुनाव 2019 में मिला है टिकट, जानिए क्या है कहानी

3 min read
Apr 15, 2019
Mulayam Family

वाराणसी. राजनीतिक में कभी भी कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अखिलेश यादव व मायावती की पार्टी का गठबंधन है। लोकसभा चुनाव 2019 में सपा व बसपा गठबंधन करके चुनाव लड़ रही है और दोनों प्रत्याशियों के नेता को चुनाव जीताने के लिए साथ में प्रचार भी करेंगे। बड़ा सवाल यह है कि जिस पार्टी के विलय को लेकर मुलायम सिंह यादव के परिवार में कोहराम मचा था और बाद में शिवपाल यादव को सपा छोडऩी पड़ी थी उसी पार्टी के बाहुबली नेता के भाई का चुनाव प्रचार अखिलेश यादव करेंगे।
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बसपा ने बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया है। जबकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद ही आजमगढ़ संसदीय सीट से प्रत्याशी है। ऐसे में राजनीति में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अखिलेश यादव भी अफजाल अंसारी का चुनाव प्रचार करेंगे। यूपी चुनाव 2017 के पहले बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी कौएद का सपा में विलय हुआ था जिसका अखिलेश यादव ने सबसे अधिक विरोध किया था इसके बाद भी शिवपाल यादव ने कौएद का सपा में विलय कराया था और कहा था कि हम मुख्तार अंसारी को नहीं उनके परिवार के अन्य सदस्यों को विधानसभा चुनाव में टिकट देंगे। इसके बाद भी अखिलेश यादव नहीं माने थे और सपा से कौएद का विलय खत्म कराया था। इसके बाद नाराज अंसारी बंधु ने अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला था ओर बाद में जाकर बसपा का दामन थामा था।
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बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे ने खीची है बड़ी लकीर, कर रहे अखिलेश का प्रचार
पूर्वांचल के मुस्लिम वोटरों पर अंसारी बंधु का दबदबा रहता है। बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने बड़ी लकीर खीचते हुए आजमगढ़ में अखिलेश यादव का चुनाव प्रचार किया है। अखिलेश यादव के पक्ष में लोगों से मतदान करने की अपील करते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर सीएम योगी पर हमला बोला था। ऐसे में अब देखना है कि अखिलेश यादव अपनी नाराजगी दूर करते हुए अफजाल अंसारी के पक्ष में चुनाव प्रचार करते हैं कि नहीं।
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गाजीपुर संसदीय सीट पर गठबंधन को मिल सकता है कांग्रेस प्रत्याशी से लाभ
गाजीपुर संसदीय सीट पर बीजेपी ने वर्तमान सांसद मनोज सिन्हा को प्रत्याशी बनाया है जबकि कांग्रेस ने यहां से अजीत प्रताप कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है। इसी क्रम में सपा-बसपा गठबंधन के तहत बसपा ने अफजाल अंसारी को चुनाव लडऩे का टिकट दिया है। जातीय समीकरण की बात की जाये तो मनोज सिन्हा की सीट फंस सकती है। कांग्रेस प्रत्याशी यहां के मौर्या वोट को बीजेपी में जाने से रोक सकता है। जबकि सपा-बसपा को यादव, मुस्लिम व दलित वोट मिलने की उम्मीद हैं। गाजीपुर सीट का चुनाव परिणाम वहां की जनता तय करेगी। इतना अवश्य है कि इस सीट पर जबरदस्त चुनावी मुकाबला देखने के साथ अखिलेश यादव पर भी सबकी नजर रहेगी कि वह चुनाव प्रचार करते हैं कि नहीं।
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Published on:
15 Apr 2019 02:12 pm
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