
Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav:उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में पीडीए (PDA) का पूरा गणित विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि पीडीए का फुल फॉर्म पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक है। इसमें मुस्लिम भाई, जैन, बौद्ध, पारसी, सिख, ईसाई और वे अल्पसंख्यक भी शामिल हैं जो छूट गए हैं। साथ ही आधी आबादी और वे सभी लोग जो पीड़ित हैं, अपमानित हो रहे हैं या तकलीफ झेल रहे हैं, वे भी इसमें आते हैं। पीड़ित वर्ग में ब्राह्मण भी हो सकते हैं। पीडीए का मतलब है प्यार, करुणा और अपनेपन की भावना।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर वे पीडीए में ‘ए’ को अंगद कहें तो भी यह पूरा लगता है। ‘ए’ अगर अग्रवाल के लिए भी हो तो कोई समस्या नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई अग्रवाल भाजपा से सपा में आया और उसे पीड़ा झेलनी पड़ी, कपड़े फाड़े गए, तो क्या समाजवादी उसे टिकट नहीं दे सकते? भाजपा वाले उनके कपड़े फाड़ते हैं और वोट गिनती में हराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम बहुरंगी लोग हैं जो सबको एक छत्र के नीचे जोड़ना चाहते हैं।
अखिलेश यादव ने ओमर अब्दुल्ला के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने सही कहा है और उनका रुख सही है। लेकिन समाजवादी पार्टी का रुख साफ है कि वे बैलेट पेपर चाहते हैं और ईवीएम हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सपा ईवीएम से सभी 80 सीटें जीत जाए, फिर भी वे ईवीएम के खिलाफ हैं। जर्मनी और दुनिया के कई देशों में बैलेट से वोटिंग को संवैधानिक माना जाता है, जबकि ईवीएम से वोटिंग असंवैधानिक है। अमेरिका में भी वोटिंग होने वाली है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि वाराणसी जैसे प्रधान शहर में भाजपा के विश्व स्तरीय विकास के दावों का तमाशा शर्म से पानी-पानी हो गया है। क्योटो नहीं बना पाए तो क्योटो की तस्वीर ही लगा दी।
अखिलेश यादव के इन बयानों से साफ है कि सपा पीडीए के व्यापक सामाजिक समीकरण के साथ 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटी है।