पटेल को नया प्रदेश अध्यक्ष बना अखिलेश ने पूर्वांचल में साधा एक तीर से कई निशाना

जानिये क्या है रणनीति...
2 min read
• •
Updated: 1 Jan 2017, 5:11 PM IST
Naresh Uttam Patel
Naresh Uttam Patel
वाराणसी. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सीएम अखिलेश यादव ने चला है बड़ा दांव। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल के खास रहे नरेश उत्तम पटेल को यह जिम्मेदारी सौंप कर जहां एक तरफ जहां शिवपाल का कद छोटा करने की चाल चली है, तो वहीं सबसे बड़े विरोधी भाजपा के अपना दल (अनुप्रिया) संग गठबंधन पर भी तीखा प्रहार किया है। उनके इस चाल के निशाने पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी आ सकते हैं। सीएम की इस चाल का असर खास तौर पर पूर्वांचल में इसका व्यापक पैमाने पर पड़ सकता है।





शिवपाल को करारा प्रहार
बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जहां सारी पार्टियां जातिय समीकरण अपने पक्ष में मोड़ने में लगी हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुर्मी वोटों के ध्रुवीकरण के लिए पटेल बिरादरी में अच्ची खासी पैठ रखने वाले नरेश उत्तम पटेल को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। बतादें कि पटेल शिवपाल गुट के रसूखदार नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। ऐसे में एक तरह से यह शिवपाल यादव पर यह करारा प्रहार माना जा रहा है।





भाजपा पर पड़ेगी चोट
इसके अलवा अखिलेश की रणनीति का असर भाजपा पर भी सीधे तौर पर पड़ सकता है। बता दें कि पूर्वांचल में कुर्मी वोट के ध्रुवीकरण के लिए ही अपना दल में टूटन पैद कर अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाया। ऐसे में राजनीतिक गलियारे मंा यह चर्चा चलने लगी थी कि अनुप्रिया का प्रभाव विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में कुर्मी वोटों के ध्रुवीकरण में काम आएगा। लेकिन एक ही झटके में अखिलेश ने इस पर बड़ी चोट कर दी है।




नीतीश पर भी पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश की इस चाल से नीतीश कुमार की यूपी में पैठ बनाने की कोशिशों पर भी प्रभाव पड़ेगा। कारण यूपी में नरेश उत्तम पटेल पुराने समाजवादी पार्टी के रूप में जाने जाते हैं। कुर्मियों के बीच उनकी अच्छी खासी पैठ है। ऐसे में कोई नीतीश को बाहरी बता कर नरेश कुर्मी वोटों के बीच अपनी बातों को सहज रूप से रख पाएंगे। साथ ही उन्हें तवज्जो भी मिल पाएगी।



नरेश की है साफ सुथरी छवि
राजनीतिक गलियारों में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार नरेश उत्तम पटेल बेदाग छवि के नेता हैं। पुराने समाजवादी हैं। ऐसे में उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की सूरत में कोई भी अखिलेश के फैसले पर अंगुली नहीं उठा पाएगा। राष्ट्रीय राजनीति के साथ ही प्रदेश में भी सपा को एक ऐसा चेहरा मिल गया है जिसे भुनाना आसान होगा।




राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल पर निशाना
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह से पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल और उनके भाई महेंद्र पटेल ने शनिवार को मुलायम सिंह के अधिवेशन में बढ़ चढ़ कर शिरकत की, उसके बाद अगर वे मुलायम का हाथ थामते भी हैं तो अखिलेश के पास इन दोनों सीटों के लिए भी नरेश अपना प्रभाव डाल सकते हैं।



Published on: