खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जब इस नेटवर्क को पहली बार खड़ा किया गया था, तब इसका मुख्य आधार पैसा और लग्जरी लाइफस्टाइल का झांसा देना था। युवाओं को मात्र 5,000 रुपये में आपराधिक गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता था और उन्हें भट्टी व उसके सहयोगियों की महंगी कारों और आलीशान घरों की तस्वीरें दिखाई जाती थी।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के कड़े शिकंजे और 700 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब इस रणनीति में बदलाव किया गया है। अब भट्टी और उसके हैंडलर्स का पूरा फोकस युवाओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने पर है। इस बार कम पैसों (करीब 3,000 से 5,000 रुपये) का लालच देकर धार्मिक पहचान और कट्टरता के नाम पर युवाओं को मोहरा बनाया जा रहा है। साथ ही उन्हें दुबई, पाकिस्तान या नेपाल में बेहतर जिंदगी देने के फर्जी सपने दिखाए जा रहे हैं।