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सोशल मीडिया पर सरकार का शिकंजा: एल्गोरिदम चलाने वाली कंपनियों से छिन सकता है ‘सेफ हार्बर’ कवच

भारत सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कानूनी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। नए नियमों में एल्गोरिदम चलाने वाली कंपनियों से 'सेफ हार्बर' कवच छिन सकता है।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Updated: 6 Nov 2026, 1:45 PM IST

New rules for social media

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

केंद्र सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कानूनी ढांचे में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस पर चर्चा शुरू की है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म को आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 के तहत मिली सुरक्षा जारी रहनी चाहिए या नहीं।

क्या है 'सेफ हार्बर'?

IT एक्ट की धारा 79 बिचौलियों (इंटरमीडियरी) को तीसरे पक्ष के कंटेंट की देनदारी से सुरक्षा देती है, बशर्ते वे तय 'ड्यू डिलिजेंस' नियमों का पालन करें। यानी यह सुरक्षा पहले से ही सशर्त है। नियम न मानने पर कंपनी इसे खो सकती है। इसी कवच के कारण प्लेटफॉर्म यूजर्स के हर पोस्ट, वीडियो या कमेंट के लिए सीधे कानूनी तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराए जाते।

सरकार का तर्क: अब 'निष्क्रिय वाहक' नहीं

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, विचाराधीन प्रस्ताव में सेफ हार्बर को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, टेलीकॉम ऑपरेटर और पीयर-टू-पीयर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित करने की बात है। दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार में यह राय बन रही है कि प्लेटफॉर्म रैंकिंग और मॉडरेशन सिस्टम के जरिए संपादकीय नियंत्रण रखते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जो इंटरमीडियरी एल्गोरिदम से कंटेंट को रैंक, प्रमोट या दबाते हैं, उनकी भूमिका सक्रिय है, इसलिए 'ब्लैंकेट' सुरक्षा की समीक्षा जरूरी है।

अन्य प्रस्ताव भी टेबल पर

सरकार यह भी देख रही है कि बड़े प्रोडक्ट बदलाव से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अधिकारियों को सूचना देनी होगी। साथ ही डीपफेक और बिना सहमति वाली आपत्तिजनक तस्वीरों पर शिकायतों के निपटारे की सख्त व्यवस्था बनाने पर भी विचार है। इसकी पृष्ठभूमि में जुलाई में मंत्रालय का वह निर्देश है, जिसमें व्हाट्सऐप को प्रस्तावित यूजरनेम फीचर रोकने को कहा गया था।

किन घटनाओं से बढ़ी तल्खी?

रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक पर अस्थायी रूप से रोके जाने के बाद मंत्रालय ने मेटा के वैश्विक नीति अधिकारियों को तलब किया था। एक्स की सहयोग पोर्टल सहित सरकार के टेकडाउन ढांचे को दी गई चुनौती भी कर्नाटक हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में खारिज कर दी थी। कंपनी ने इसके खिलाफ अपील की है।

संसद और सुप्रीम कोर्ट का दबाव

संचार और IT पर संसदीय स्थायी समिति (अध्यक्ष: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे) ने सेफ हार्बर वापस लेने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर के आदेश में कहा कि सामान्य चूक पर सेफ हार्बर छीनना बहुत कठोर है, लेकिन लगातार उल्लंघन के लिए यह काफी कमजोर रोकथाम भी है। कोर्ट ने जुर्माने जैसे आनुपातिक दंड वाले अलग ढांचे की जरूरत बताई, जिसमें सेफ हार्बर हटाना अंतिम उपाय हो।

पहले से सख्ती की कोशिश

इसी साल मंत्रालय ने आईटी रूल्स, 2021 में संशोधन का मसौदा जारी कर अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकने वाले कंटेंट को वास्तविक जानकारी मिलने के तीन घंटे में हटाने की शर्त रखी थी। इन निर्देशों का पालन धारा 79 की ड्यू डिलिजेंस का हिस्सा माना जाना था। इसकी टिप्पणियों की अंतिम तारीख 14 अप्रैल 2026 थी।

कितना पक्का है प्रस्ताव?

अभी यह शुरुआती चर्चा के स्तर पर है और कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धारा 79 में बड़े बदलाव के लिए आईटी एक्ट में संशोधन और संसद की मंजूरी जरूरी होगी। इसी रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय, मेटा और गूगल ने सवालों का जवाब नहीं दिया।