इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, विचाराधीन प्रस्ताव में सेफ हार्बर को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, टेलीकॉम ऑपरेटर और पीयर-टू-पीयर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित करने की बात है। दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार में यह राय बन रही है कि प्लेटफॉर्म रैंकिंग और मॉडरेशन सिस्टम के जरिए संपादकीय नियंत्रण रखते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जो इंटरमीडियरी एल्गोरिदम से कंटेंट को रैंक, प्रमोट या दबाते हैं, उनकी भूमिका सक्रिय है, इसलिए 'ब्लैंकेट' सुरक्षा की समीक्षा जरूरी है।