वाराणसी

हाईकोर्ट का सीएम योगी सरकार को झटका, अवैध खनन में फंसे दो जिलाधिकारी को बचाने पर नाखुश

हाईकोर्ट के सख्त रवैया से यूपी सरकार में हड़कंप, जानिए क्या है कहानी
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Updated: 3 Feb 2018, 12:14 PM IST
High Court
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वाराणसी/इलाहाबाद. सपा के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव पर नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाने वाली बीजेपी खुद मुसीबत में फंस गयी है। अवैध खनन में दो जिलाधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाखुशी जतायी है। हाईकोर्ट ने दी दोनों अधिकारियों का निलंबित करने को कहा था इसके बाद भी सीएम योगी सरकार ने ऐसा नहीं किया। यूपी सरकार की तरफ से मुख्य सचिव ने दोनों अधिकारियों के प्रकरण को लेकर हलफनामा सौंपा था जिस पर भी कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया है। हाईकोर्ट ने अब 16 फरवरी को इसी मामले में रिपोर्ट देने को कहा है।
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सामाजिक कार्यकर्ता मकसूद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आरोप लगाया है कि रोक के बाद भी रामपुर की कोसी नदी में अवैध खनन जारी है। अवैध खनन में तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेला व राकेश कुमार सिंह ने कोर्ट के निर्देश की अनदेखी करते हुए अवैध खनन कराने का आरोप है। न्यायमूर्ति डीबी भोसले व न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने इस मामले में 13 दिसम्बर को दोनों जिलाधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया था। वर्तमान समय में राजीव रौतेला गोरखपुर के जिलाधिकारी हैं जो सीएम योगी आदित्यनाथ का गृह नगर है जबकि दूसरे जिलाधिकारी राकेश सिंह कानपुर देहात के डीएम है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्य सचिव ने कोर्ट ने हलफनामा दाखिल किया था जिस पर हाईकोर्ट ने असंतोष जताया है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर अगली सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की है साथ ही मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि हलफनामा दाखिल करके बताएं कि दोनों आरोपी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गयी है या नहीं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यूपी सरकार में हड़कंप मच गया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद साफ हो जाता है कि अब आरोपी जिलाधिकारियों को बचाना यूपी सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
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