
वाराणसी. चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों ने अपने समीकरण साधने शुरू कर दिये हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के पहले यूपी में अखिलेश यादव, मायावती व राहुल गांधी का महागठबंधन हो सकता है, जबकि बीजेपी का साथ अनुप्रिया पटेल का अपना दल व ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा दे सकती हैं। चुनाव में किस गठबंधन को जीत मिलती है यह तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा। इतना अवश्य कहा जा सकता है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पार्टी में चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह ने विरोधी खेमे के हवा निकालने के लिए बडा दांव खेल दिया है।
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बीजेपी जानते हैं कि यदि विपक्ष से उसका सीधा मुकाबला होता है तो लड़ाई फंस सकती है इसलिए बीजेपी ने पर्दे के पीछे से बड़ी योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। शिवपाल यादव ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बना कर उसमे छोटे दलों को जोडऩा शुरू कर दिया है। अभी तक अखिलेश यादव भी छोटे जातिगत दलों को जोड़ कर सपा को मजबूत करने में जुटे थे लेकिन शिवपाल यादव का मोर्चा बन जाने से सपा को झटका लगा है। छोटे दलों के पास अब शिवपाल यादव व अखिलेश यादव दोनों के पास जाने का मौका है ऐसे में छोटे दल अपने शर्त पर किसी के साथ जाने को तैयार हो रहे हैं जबकि शिवपाल यादव के मोर्चा बनाने से पहले छोट दलों की यह स्थिति नहीं थी। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिवपाल यादव को लखनऊ में बड़ा बंगला देकर साबित किया है कि बीजेपी का साथ शिवपाल यादव को मिलेगा। शिवपाल यादव की नयी पार्टी का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि कुंडा के बाहुबली क्षत्रिय विधायक राजा भैया भी नयी पार्टी बनाने की तैयारी में जुट गये। शासन में चर्चा होने लगी कि राजा भैया को भी बंगला मिल सकता है। बड़ा सवाल है कि नयी पार्टी बनाने से पहले दोनों ही नेताओं को बंगला देने का कोई प्रस्ताव नहीं था लेकिन नयी पार्टी बनाने की राह पकडऩे ही बीजेपी ने शिवपाल यादव व राजा भैया के लिए सौगातो की झोली खोल दी है जिससे पता चलता है कि नयी पार्टी का ऐलान होने से बीजेपी बेहद खुश है।
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अमित शाह के प्लान पर चल रही है बीजेपी
अमित शाह के प्लान पर बीजेपी चल रही है। बीजेपी चाहती है कि यूपी में इन दल चुनाव में उतर जाये कि वोटों का जबरदस्त बंटवारा हो और उसका लाभ भगवा दल को मिल जाये। बीजेपी के पास कोई बड़ा यादव नेता नहीं है जो यादव वोटों में सेंधमारी कर सके। शिवपाल के प्रत्याशी जितना भी वोट पायेेंगे। उतना नुकसान सपा को उठाना होगा। पूर्वी यूपी में शिवपाल यादव की अधिक ताकत नहीं है लेकिन पश्चिमी यूपी में शिवपाल यादव का अपना वोट बैंक है। पूर्वी यूपी की राजनीति में बीजेपी के लिए राजा भैया काम आ जायेंगे। चुनाव से पहले अन्य दल के नेता भी अपनी पार्टी से अलग होकर नया दल बनाने की तैयारी में जुट गये हैं जिसका सीधा लाभ बीजेपी को होना तय है। लोकसभा चुनाव में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष ढंग से बीजेपी को महागठबंधन से अधिक दलों का समर्थन मिल जायेगा।
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