
वाराणसी. बीजेपी व सहयोगी दलों के तीन बड़े नेता ऐसे हैं जो अखिलेश यादव व मायावती को सीधी टक्कर दे सकते हैं। तमात विवाद के बाद भी बीजेपी इन नेताओं को साइड लाइन नहीं कर पाती है। यूपी चुनाव में इन तीनों नेता का करिश्मा सभी ने देखा था जब राहुल गांधी व अखिलेश यादव का गठबंधन भी फेल हो गया था अब देखना है कि लोकसभा चुनाव २०१९ में इन नेताओं की कितनी चलती है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी की चुनावी रैली व अमित शाह की रणनीति के बाद भी बीजेपी को जाति विशेष नेताओं की जरूरत होती है जो अपने जाति के वोटरों को बीजेपी से जोड़ सके। यूपी की राजनीति में आज भी जातिगत समीकरण भी विकास पर भारी पड़ जाता है। मुलायम सिंह यादव ने यादव व मुस्लिम समीकरण को साध कर यूपी की सत्ता पर कब्जा किया था जबकि मायावती ने दलित व अति पिछड़ों को अपने पक्ष में करके बसपा को बड़ी ताकत बनायी थी। सपा व बसपा से टूट कर पिछड़े वर्ग के वोटर जब बीजेपी से जुड़ गये तो कहानी ही बदल गयी। यूपी चुनाव में पहली बार बीजेपी को रिकॉर्ड संख्या में सीट मिली।
जानिए बीजेपी व सहयोगी दल के तीन बड़े नेता
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या
लोकसभा चुनाव 2014 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी की लहर में केशव प्रसाद मौर्या पहली बार फूलपुर से सांसद चुन कर आये थे। इसके बाद केशव प्रसाद मौर्या उस समय चर्चा में आये जब उन्हें बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। केशव प्रसाद मौर्या के नेतृत्व में बीजेपी को यूपी में बंपर जीत मिली। केशव प्रसाद मौर्या का नाम सीएम रेस में भी था लेकिन बाद में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी के लिए एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। पिछड़े वर्ग के वोटरों में अच्छी पैठ होने का लाभ बीजेपी को दिला सकते हैं।
केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल
बीजेपी ने पटेल वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए अपना दल से गठबंधन किया था बीजेपी का यह दांव सफल हुआ और लोकसभा के साथ विधानसभा में भी पटेल वोट मिले। बीजेपी में भी बड़े पटेल नेता है लेकिन अनुप्रिया पटेल की जगह नहीं ले पाते हैं। अखिलेश यादव ने पटेल वोटरों में सेंधमारी के लिए नरेश उत्तम पटेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को विजय रथ दौड़ाना है तो एक बार फिर अनुप्रिया पटेल की जरूरत होगी।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर
अमित शाह व सीएम योगी के युवा उद्घोष में जितनी भीड़ नहीं जुटी थी उससे अधिक भीड़ ओमप्रकाश राजभर की रैली में होती है। यूपी में राजभरों के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की काट भी बीजेपी नहीं निकाल पायी है। बीजेपी ने राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त अनिल राजभ को प्रमोट कर राजभर वोटों मे ंसेंधमारी का प्रयास किया था लेकिन ओमप्रकाश राजभर के सामने उनकी नहीं चली। ओमप्रकाश राजभर लगातार बीजेपी पर हमला बोलते रहते हैं लेकिन बीजेपी उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत तक जुटा नहीं पाती है क्योंकि वह जानती है कि लोकसभा चुनाव में ओमप्रकाश राजभर का साथ नहीं मिला तो राजभर वोट खिसक जायेगा। बीजेपी व सहयोगी दल के यह नेता मायावती व अखिलेश यादव के महागठब्ंधन को झटका देने की क्षमता रखते हैं अब देखना है कि लोकसभा चुनाव में कौन नेता किस पर भारी पड़ता है।
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