
वाराणसी. बीजेपी की सपा, बसपा व कांग्रेस के संभावित महागठबंधन को झटका देने के लिए बनायी योजना अब गले की फांस बन सकती है। लोकसभा चुनाव 2019 में कमल खिलाने के लिए भाजपा ने खास रणनीति बनायी है लेकिन इस योजना को लागू किया तो एनडीए गठबंधन में भी बिखराव के साथ बीजेपी का वोट बैंक भी खिसक सकता है।
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बीजेपी ने पिछड़ी जाति के तीन भाग में बांटने की योजना बनायी है जिसके लिए कमेटी तक गठित कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वर्ष 2002 में यूपी के तत्कालीन सीएम राजनाथ ने इस योजना पर काम शुरू किया था लेकिन यूपी से भाजपा की सरकार जाने के बाद योजना पूर्ण नहीं हो पायी। यूपी में अब सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार है और पीएम मोदी सरकार भी चाहती है कि अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए पिछड़ी जाति के तीन भाग में बांट दिया जाये। बीजेपी का मानना है कि सभी पिछड़ों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है सिर्फ कुछ पिछड़ी जाति ही इस आरक्षण का लाभ ले रही है ऐसे में पिछड़ों के तीन भाग में बांटने से आरक्षण का लाभ सभी को मिलेगा। बीजेपी ने अपने राजनीति फायदे के लिए भी यह योजना बनायी है जिन जातियों को अब तक आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिलता है वह योजना लागू होने के बाद बीजेपी के कैडर वोटर हो जायेंगे। पार्टी का माना है कि ऐसा हुआ तो राहुल गांधी, अखिलेश यादव व मायावती का संभावित महागठबंधन भी लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को टक्कर नहीं दे पायेगा।
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लागू होने से पहले ही गले की फांस बन रही योजना
लागू होने से पहले ही योजना बीजेपी के लिए गले की फांस बन रही है। माना जाता है कि पिछड़ों में यादव का बड़ा वर्ग छोड़ कर अन्य जाति में सबसे अधिक सेंधमारी बीजेपी ने की है। योजना को लागू होते ही पिछड़ों की कुछ जातियों को नुकसान होना तय है। अपना दल के कैडर मतदाताओं को भी नुकसान हो सकता है इसलिए योजना लागू होते ही एनडीए गठबंधन में भी दरार आ सकती है। सूत्रों की माने तो योजना लागू करने से पहले बीजेपी फायदे और नुकसान पर मंथन करेगी। बीजेपी को अगर नुकसान होगा तो योजना लागू नहीं की जायेगी। बीजेपी की इस कमजोरी को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जान चुकी है इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर लगातार योजना लागू करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बनाने में जुटे हुए हैं।
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