
वाराणसी. राजस्थान में हुए उपचनुाव में हार के चलते बीजेपी अब बैकफुट पर आ गयी है। संसदीय चुनाव 2019 में बीजेपी ने ऐसे सांसदों का टिकट काटने की तैयारी की है जिन्होंने क्षेत्र में काम नहीं किया है। पूर्वांचल में आधा दर्जन से अधिक सांसदों के टिकट काटे जायेंगे। पार्टी अब सभी सांसदों की रिपोर्ट कार्ड तैयार कराने में जुट गयी है इसी रिपोर्ट के आधार पर सांसदों के भविष्य पर निर्णय होगा।
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पीएम नरेन्द्र मोदी ने लगातार सांसदों को निर्देश दिया था कि केन्द्र सरकार की योजनाओं के अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों तक पहुंचायी जाये। इसके बाद भी आधा दर्जन से अधिक सांसद ऐसे हैं जिन्होंने पीएम के निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया है। इसके अतिरिक्त लेटर बाज सांसदों के चलते भी बीजेपी की किरकिरी हुई है। बीजेपी अभी तक ऐसे सांसदों को लेकर मौन थी, लेकिन संसदीय चुनाव 2019 में टिकट वितरण के समय ऐसे सांसदों से पार्टी अपना हिसाब चुकता करेगी। राजस्थान की दो संसदीय सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली है, जिसके चलते कांग्रेस के मजबूत होने व बीजेपी के कमजोर होने का संदेश गया है। यूपी की दो सीटों पर भी उपचुनाव होने वाला है यहां भी बीजेपी को हार मिलती है तो संसदीय चुनाव 2019 की राह कठिन हो जायेगी। बीजेपी सूत्रों की माने तो प्रत्याशी के चयन में अब खास सावधानी बरती जायेगी। इसके लिए सांसदों का टिकट काटना पड़े तो भी पार्टी हिचकेगी नहीं।
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बीजेपी पर बढ़ रहा है सहयोगी दलों को दबाव
यूपी की बात की जाये तो बीजेपी की सहयोगी दल में अपना दल व सुभासपा शामिल है। संसदीय चुनाव 2014 में बीजेपी ने 73 सीटो पर जीत दर्ज की है, जबकि दो सीटों पर सहयोगी पार्टी अपना दल को जीत मिली है। सुभासपा ने भी पांच टिकट के लिए बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री व सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने सरकार से नाराज होकर इस्तीफे तक की धमकी दे दी है। इससे साफ हो जाता है कि यदि संसदीय चुनाव 2019 में अपना दल की तरह सुभासपा को सीटे नहीं मिली तो दोनों पार्टी की राह अलग हो जायेगी। सुभासपा ने पूर्वांचल की 29 सीटों में से पांच सीटों पर अपना दावा ठोका है, ऐसे में संसदीय चुनाव 2019 में बीजेपी ने सुभासपा को टिकट दिया तो भी बीजेपी को अपने सांसदों का ही टिकट काटना होगा। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि संसदीय चुनाव में बीजेपी के आधा दर्जन से अधिक सांसदों को टिकट कटना तय है इसमे अधिक आयु के सांसद भी शामिल होंगे।
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