वाराणसी

Chhath Puja 2017: इस शुभ मुहूर्त में दें छठ मां को अर्घ्य, भरेगी सूनी गोद

कार्तिक मास की षष्ठी को मनाते है छठ महापर्व

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छठ पूजा

वाराणसी. दिवाली की धूम के छह दिन बाद छठ का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष में दो बार मनाए जाने वाले छठ महापर्व की पवित्रता, श्रद्धा और आस्था के लिए जाना जाता है। पहला छठ पर्व चैत्र माह में और दूसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है। कार्तिक माह की षष्ठी को मनाया जाने वाले इस महापर्व का खास महत्व है। यूपी, बिहार, पूर्वांचल, झारखंड और नेपाल के कई हिस्सों में छठ पूजा को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है।



एक कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी। तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र मृत पैदा हुआ।


प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूं। राजन तुम मेरा पूजन करो तथा और लोगों को भी प्रेरित करो। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी। मूलतः सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। पारिवारिक सुख-समृद्घि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है।


छठ का व्रत
छठ की पूजा गंगा,यमुना नदी या फिर पोखरों में की जाती है। इसका व्रत नहा खा के शुरू होता है। चौथे दिन सूर्यास्त में अर्ध्य दिया जाता है। तत्पश्चात ही भोजन किया जाता है। अर्ध्य देने के बाद यह पूजा समाप्त होती है। इस व्रत में महिलाएं दो दिन तक उपवास रखती हैं और अपने पति व पुत्र की दीर्घायु की कामना करती हैं। पंचमी को उपवास करके संध्याकाळ में किसी तालाब या नदी में स्नान करके सूर्य भगवान को अर्ध्य दिया जाता है। तत्पश्चात ही भोजन किया जाता है। षष्ठी के दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद संकल्प लिया जाता है।



अर्ध्य की वि‍धि

अर्ध्य देने की भी एक विधि होती है। एक बांस के सूप में केला एवं अन्य फल, अलोना प्रसाद, ईख आदि रखकर उसे पीले वस्त्र से ढक दें| तत्पश्चात दीप जलाकर सूप में रखें और सूप को दोनों हाथों में लेकर इस मन्त्र का उच्चारण करते हुए तीन बार अस्त होते हुए सूर्यदेव को अर्ध्य दें।



पढें ये मंत्र
ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

छठ पूजा 2017 : शुभ मुहूर्त

छठ पूजा पर सूर्योदय- सुबह 6.41 जैसे

छठ पूजा 2017 : शाम 6.05 बजे

छठ पर्व तिथि - 26 अक्तूबर 2017, गुरुवार

षष्ठी तिथि प्रारंभ - प्रात: 09:37 बजे से (25 अक्तूबर 2017)

षष्ठी तिथि समाप्त - दोपहर 12:15 बजे तक (26 अक्तूबर 2017)

Published on:
21 Oct 2017 09:55 am
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