
वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट प्रवासी सम्मेलन में आने वाले लोगों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती बन सकता है। बनारस में इस समय ताबड़तोड़ क्राइम ने सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। नवम्बर में पीएम नरेन्द्र मोदी का आगमन होना है ऐसे में पीएम के सामने बनारस की सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठ सकता है।
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बनारस में पिछले दो माह में अपराध की ताबड़तोड़ वारदात हुई है। अपराध का तरीका बता रहा है कि अपराधियों पर पुलिस प्रशासन का खौफ नहीं रह गया है। अपराधी बेलगाम हो चुके हैं और मॉल तक आम लोगों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। हाल में ही बनारस के दौरे पर आये सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा व्यवस्था को ठीक करने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन सीएम के जाते ही ताबड़तोड़ क्राइम ने सारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। जेएचवी मॉल में हुए डबल मर्डर ने पुलिस प्रशासन को हिला कर रख दिया है। अति सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र के मॉल में अपराधियों ताबड़तोड़ फायरिंग कर दो लोगों को मौत की नीद सुला दी थी। इसी मॉल के बाहर कुछ विदेशी भी थे और जेएचवी में विदेशी पर्यटक भी जाते हैं। बड़ा सवाल है कि प्रवासी सम्मेलन में आये प्रवासी भारतीय जब बनारस को देखने जायेंगे तो उनकी सुरक्षा कौन करेगा।
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इन अपराधों ने पुलिस व्यवस्था पर खड़ा किया सवाल
चौबेपुर में प्रदेश में पहली बार डेटोनेटर ब्लास्ट कर पिता व पुत्र की हत्या की गयी थी। हत्यारोपी तो पकड़े गये हैं लेकिन आज तक खुलासा नहीं हुआ कि डेटोनेटर कहा से मिला।
रोहनिया में पिछले माह चौकीदार की निर्मम हत्या कर दी गयी थी लेकिन आज तक पुलिस हत्यारों को नहीं पकड़ पायी है।
जेएचवी मॉल में दिनदहाड़े अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। घटना का मुख्य सूत्रधार पकड़ा जा चुका है लेकिन बाकी तीन बदमाशों का पुलिस को अभी तक सुराग नहीं मिला है।
चेतगंत में बदमाशो ंने सतीश राय की गोली मार कर हत्या कर दी थी। हत्यारों को पकडऩा तो दूर पुलिस यह तक पता नहीं कर पायी है कि हत्या क्यों हुई।
कैंट में पान विक्रेता की रात में गोली मार कर हत्या की गयी थी। कैंट पुलिस दो दिन से नामजद लोगों को पकड़ कर रखी है लेकिन अभी तक हत्या का खुलासा नहीं हुआ है।
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पुलिस थानों में मनमानी तैनाती ने बढ़ायी समस्या
पुलिस थानों में मनमानी तैनाती ने समस्या बढ़ा दी है। बीजेपी नेताओं के साथ पार्टी के संगठन के नेताओं की पैरवी पर थाना दिया जा रहा है। शहर में थानेदार बने अधिकांश पुलिस अधिकारी को स्थाननीय बदमाशों की जानकारी नहीं होती है जिसके चलते क्राइम कंट्रोल करने में दिक्कत हो रही है।
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