
वाराणसी. केरल में आयी भीषण बाढ़ के बाद नदियों की स्थिति पर मंथन शुरू हो गया है। केरल बाढ़ के लिए नदियों के पेटा पर हुए अवैध निर्माण को बड़ी वजह माना जा रहा है। राज्य सरकारों पर भू मफिया का इतना अध्किा दबाव होता है कि ऐसे अतिक्रमण को रोकना संभव नहीं होता है। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की बात की जाये तो यहां की कहानी भी ऐसी है। वरुणा के पेटा पर अवैध ढंग से निर्माण किये गये हैं। अखिलेश यादव के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार भी इन निर्माण पर कार्रवाई करने में अक्षम साबित हो रही है।
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वीडीए की रिपोर्ट के अनुसार वरुणा नदी के ग्रीन कॉरीडोर पर अतिक्रमण करके भवन बनाये गये हैं। समय-समय पर राज्य सरकार इन अतिक्रमण को ध्वस्त करने की बात करती आयी है लेकिन होता कुछ नहीं है। यूपी चुनाव से पहले तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने वरुणा कॉरीडोर योजना शुरू की थी। योजना के तहत वरुणा न दी के किनारे का अतिक्रमण भी हटाना था लेकिन भू माफिया का सरकार पर दबाव पड़ा तो वीडीए की जेसीबी भी वापस लौट आयी। यूपी में भू माफिया पर कार्रवाई का वादा करके सत्ता में आयी बीजेपी सरकार भी सवालों के घेरे में है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार से कार्रवाई की क्या उम्मीद की जाये। वरुणा नदी के किनारे अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू करने वाले आईएएस अधिकारी पुलकित खरे को ही हटा दिया गया था इसके बाद से सरकार ने वरुणा कॉरीडोर के किनारे के अतिक्रमण को लेकर मौन साध लिया है। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कई बार अतिक्रमण हटाने की बात कही थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अवैध निर्माण के चलते बदल रहा वरुणा नदी का रास्ता
अवैध निर्माण के चलते वरुणा नदी का रास्ता बदल रहा है। पूर्वांचल में अभी तक सामान्य से कम बारिश हुई है जिसके चलते वरुणा का जलस्तर नहीं बढ़ा है यदि केरल जैसी बारिश यहां पर होती है तो वरुणा का जल भयानक तबाही मचाने के लिए काफी होगा। पीएम नरेन्द्र मोदी ने खुद ही बाढ़ प्रभावित केरल का दौरा करके वहां की स्थिति पर चिंता जतायी थी अब देखना है कि केरल से सबक लेकर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में वरुणा नदी को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए सीएम योगी सरकार कुछ करती है या नहीं।
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