
वाराणसी. यूपी चुनाव के समय किसी ने नहीं सोचा था कि बीजेपी को तीन सौ से अधिक सीट मिल सकती है। पीएम नरेन्द्र मोदी की ताबड़तोड़ चुनावी रैली का असर हुआ कि पहली बार भगवा पार्टी को इतनी सीट मिली थी। यूपी चुनाव जितने के बाद आरएसएस के दबाव में बीजेपी ने गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया है इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ भी मध्यप्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती की राह पर चलने लगे और बीजेपी को झटके पर झटका लगने लगा।
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सीएम योगी आदित्यनाथ अब उमा भारती की राह पर चल रहे हैं। बीजेपी ने मध्यप्रदेश में उमा भारती को सीएम बनाया था लेकिन वह अधिक दिन कार्यभार नहीं संभाल पायी थी। उमा भारती पर आरोप लगते थे कि वह सरकारी काम से अधिक पूजा-पाठ पर ध्यान देती थी। गाय को चारा खिलाने से लेकर मंदिरों में जाकर दर्शन करने में अधिक समय बीताती थी जिसके चलते एमपी में मंत्री व अधिकारियों का गठजोड़ हो गया। आम आदमी को विकास का लाभ नहीं मिला। एमपी में जब लोगों के विरोध का स्वर तेज होने लगा तो विवश होकर बीजेपी ने उमा भारती को हटा दिया। उस समय यह माना गया था कि सांन्यासी को सीएम पद देने का प्रयोग विफल हुआ है। इसके बाद बीजेपी ने कट्टर हिन्दू की छवि को बचाये रखने के लिए यूपी की कमान सीएम योगी को सौंपी है और सीएम योगी भी उमा भारती की राह पर चलने लगे हैं।
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नहीं छूट रहा मंदिर का मोह, चुनाव में बीजेपी को मिल चुकी है हार
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पद संभालने के बाद से सबसे अधिक दौरा गोरखपुर का किया है। गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी को हार मिली है इसके बाद भी सीएम योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर से मोह भंग नहीं हुआ। यूपी में किसी जिले का दौरा करने के बाद सीएम योगी फिर से गोरखपुर पहुंच जाते हैं। सीएम योगी जब लखनऊ में नहीं होते हैं तो खास मंत्री व अधिकारी प्रदेश की कमान संभालते है जो अपने अनुसार अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं इसके चलते सीएम योगी की हनक खत्म हो रही है और मंत्री व अधिकारियों की मनमानी के चलते जनता को राहत नहीं मिल रही।
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सीएम योगी आदित्यनाथ चेहरा देख कर करते हैं कार्रवाई, फटकार पर चल रही सरकार
पीएम नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र बनारस बेहद खास है। यहां के विकास मॉडल के नाम पर बीजेपी चुनाव लडऩे की तैयारी में है इसके बाद भी बनारस में विकास के नाम पर जमकर मजाक हो रहा है और सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद गड़बड़ी मिलती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है। सीएम योगी कई बार बनारस आ चुके हैं लेकिन किसी अधिकारी पर गाज नहीं गिरी है। इसकी मुख्य वजह आरएसएस व बीजेपी मंत्री का अधिकारियों को साथ मिलना है। नतीजा यह हो रहा है कि पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी जनता को योजनाओं को अधिक लाभ नहीं मिल रहा।
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इन योजनाओं में मिली गड़बड़ी, कार्रवाई का हुआ कोरम पूरा
बिजली को अंडरग्राउंड करने के लिए चलायी जा रही आईपीडीएस योजना में जमकर मनमानी हुई है। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री तक ने जिम्मेदार लोगों को फटकार लगायी है लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। वरुणा नदी का पेटा अतिक्रमण से पाट दिया गया है। वरुणा कॉरीडोर का भी मानक के अनुसार निर्माण नहीं हो रहा। बीजेपी के एक नेता से सारे मामले को मैनेज कर लिया। इसके बाद सीएम योगी से लेकर सुरेश खन्ना जिम्मेदार लोगों को फटकार लगाने के साथ कार्रवाई का आश्वासन देते रह गये। कुंड व पार्क के सुन्दरीकरण का काम आज तक नहीं हुआ है। दुर्गाकुंड को छोड़ दिया जाये तो अन्य कुंड का पैसा कहा जा रहा है किसी को पता नहीं। पीएम मोदी की महत्वपूर्ण हृदय योजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर काशी के प्रसिद्ध संगीतकारों ने धरना दिया था लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई। सीएम योगी भी उसी बीजेपी नेता व अधिकारियों के दिखाये को देख रहे हैं इसके चलते अब कहा जाने लगा है कि सीएम योगी भी उमा भारती की राह पर चल रहे हैं और बीजेपी का जनाधार खिसकने लगा है।
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