
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के बीच मतभेद की अटकले लगती रहती है इन बातों में कितनी सच्चाई है यह तो समय ही बतायेगा। इतना तो साफ हो गया है कि गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट पर उप चुनाव परिणाम ही तय करेगा कि दोनों नेताओं में सिकंदर कौन है। बीजेपी के लिए दोनों ही सीट प्रतिष्ठा का विषय बन चुकी है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ के इस्तीफा देने के बाद से ही गोरखपुर संसदीय सीट खाली हुई है, जहां पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी अभी तक प्रत्याशी का ही चयन नहीं कर पायी है। सीएम योगी इस सीट पर पांच बार से सांसद रहे हैं माना जाता है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में उन्हें हराना बहुत कठिन है, ऐसे में गोरखपुर संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनाव का परिणाम तय करेगा कि सीएम योगी का गढ़ बचा रह गया है या उसमे सेंधमारी हो चुकी है। यूपी में पहली बार बीजेपी ने फूलपुर संसदीय सीट पर चुनाव जीता था। यूपी के डिप्टी सीएम बनने से पहले केशव प्रसाद मौर्या ही फूलपुर संसदीय सीट से सांसद थी और उनके इस्तीफा देने के चलते ही इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। चर्चाओं की माने तो फूलपुर संसदीय सीट के उपचुनाव के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या की पत्नी समेत कई प्रत्याशी टिकट की लाइन में है। बीजेपी किन्ही कारणों से इस सीट पर चुनाव हार जाती है तो राजनीतिक रुप से सबसे अधिक नुकसान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को ही उठाना पड़ेगा। बीजेपी में उनकी पकड़ कमजोर होगी और राजनीतिक नुकसान भी होगा।
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जो जीता वही होगा सिंकदर
बीजेपी के लिए सबसे महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव 2019 है और चुनाव से पहले पार्टी किसी तरह से भी गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट का चुनाव नहीं हारना चाहती है। यूपी में बीजेपी के पास सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के रुप में दो बड़े चेहरे हैं दोनों ही चेहरों की सीट पर बीजेपी की प्रतिष्ठा फंसी हुई है इन सीटों पर जो चुनाव जीतेगा वही नेता सिंकदर कहलायेगा।
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