अचानक गोलियों की आवाज…सड़क पर अफरातफरी… पुलिस की चीख-पुकार और ताबड़तोड़ फायरिंग। कुछ ही मिनटों में जमीन पर पड़ा था पूर्वांचल का वो नाम जिससे पूरा सिस्टम कांपता था- नाम-सोनू लुटेरा! आज की क्राइम फाइल में पढ़िए सोनू लुटेरा की पूरी कहानी ..
दोपहर का वक्त… वाराणसी का लोहता इलाका… सूरज सिर पर था, लेकिन हवा में एक अजीब सी खामोशी थी। अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा। लोग इधर-उधर भागने लगे। धूल के गुबार के बीच एक शख्स जमीन पर गिरा पड़ा था। यह कोई आम अपराधी नहीं था, यह था मनीष सिंह उर्फ सोनू लुटेरा। पूर्वांचल में दहशत का वो नाम, जिसे पुलिस पिछले एक दशक से तलाश रही थी। एसटीएफ ने दिनदहाड़े उसे घेरकर गोलियों से भून दिया था। इसी के साथ यूपी पुलिस के माथे से 10 साल पुराना सिरदर्द खत्म हो गया।
सोनू लुटेरा की अपराधी बनने की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। वाराणसी के नरोत्तमपुर का रहने वाला मनीष महज 12 साल का था जब उसकी मां की मौत हो गई। पिता ने उसे नानी के घर 'उंदी' भेज दिया। वहां मिले बेलगाम लाड़-प्यार ने उसे बिगाड़ दिया। साल 2004 तक आते-आते उसने लड़कों की एक टोली बना ली और बिहार से हथियार लाकर गुंडागर्दी की दुनिया में कदम रख दिया।
20 साल की उम्र तक सोनू पर हत्या के प्रयास और गैंगस्टर एक्ट के तीन मुकदमे दर्ज हो चुके थे। वह रंगदारी के लिए किसी पर भी गोली चला देता था। जब वह जेल गया, तो पुलिस को लगा कि वह सुधर जाएगा, लेकिन जेल के चार सालों ने उसे और खतरनाक बना दिया। 2011 में बाहर आते ही उसने महमूरगंज में एटीएम कैश वैन से 59 लाख रुपये लूटकर पूरे पूर्वांचल को हिला कर रख दिया।
59 लाख की लूट के बाद सोनू कुख्यात सनी सिंह गैंग में शामिल हो गया। 2015 में एसटीएफ के साथ हुई एक मुठभेड़ में सनी सिंह तो मारा गया, लेकिन सोनू पुलिस पर फायरिंग करता हुआ चकमा देकर निकल गया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और आजमगढ़ जैसे जिलों में उसकी सुपारी और लूट का कारोबार फैल गया।
2020 में सोनू ने अपनी क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। वह सराफा व्यापारी से लूट और हत्या के मामले में पहले से वांटेड चल रहा था। इसी बीच उसने 11 को अगस्त, 2020 को सीरगोवर्धनपुर के हिस्ट्रीशीटर अनिल यादव उर्फ कल्लू की हत्या कर दी। इसके बाद 28 अगस्त 2020 को चौकाघाट में हिस्ट्रीशीटर अभिषेक सिंह प्रिंस सहित दो लोगों की दिनदहाड़े हत्या में उसक नाम सामने आया। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से शूटर मनीष सिंह सोनू की तस्दीक हुई तो उस पर वाराणसी के आईजी रेंज की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित किया गया। नवंबर 2020 में मनीष पर घोषित इनाम की राशि 1 लाख रुपए कर दी गई। इसके बाद 9 मार्च 2021 को इनाम की राशि एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए की गई।
इसके बाद सितंबर 2020 में मिर्जापुर के एक कंपनी अधिकारी से 10 लाख की रंगदारी मांगने और उनकी हत्या के मामले में उसका नाम आया। करीब दो महीने की कड़ी मशक्कत के बाद, नवंबर में पुलिस ने सोनू की घेराबंदी की। आमने-सामने की मुठभेड़ में सोनू का सबसे करीबी गुर्गा, रोशन गुप्ता उर्फ बाबू, ढेर हो गया, लेकिन सोनू एक बार फिर पुलिस के चंगुल से फिसलने में कामयाब रहा।
अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए सोनू बेहद शातिर तरीके अपना रहा था। वह बिहार और नेपाल के बीच लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। पुलिस के लिए उसे ट्रैक करना इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि वह खुद का मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता था, इसके बजाय वह राहगीरों से फोन लूटकर अपना काम निकालता और वेश बदलकर सामान्य वाहनों में सफर करता था।
पुलिस अभी उसे तलाश ही रही थी कि अप्रैल 2021 में उसने कानून को खुली चुनौती दे डाली। पांच अप्रैल को शूलटंकेश्वर की सड़क पर उसने पत्रकार एनडी तिवारी को गोलियों से छलनी कर दिया। इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देकर वह फिर से अंधेरे में कहीं गायब हो गया, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
यूपी एसटीएफ ने हार नहीं मानी। 21 मार्च 2022 को सटीक सूचना मिली कि सोनू लोहता क्षेत्र में छिपा है। घेराबंदी हुई, दोनों तरफ से फायरिंग हुई और आखिरकार सोनू लुटेरा मारा गया। उसके पास से एक 9 एमएम की कारबाइन और पिस्टल बरामद हुई। एसटीएफ आईजी ने पुष्टि की कि पूर्वांचल का एक बड़ा कांटा निकल चुका है। 36 मुकदमों और अनगिनत परिवारों को उजाड़ने वाले सोनू लुटेरा का अध्याय अब हमेशा के लिए बंद हो चुका है।