
डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. धन, यश, कीर्ति, व्यवसाय, रोजगार आदि इन सभी के लिए धन त्रयोदशी और दीपावली पूजन का सभी को रहता है इंतजार। हर कोई माता लक्ष्मी को प्रसन्न कर अपना भाग्योदय चाहता है। ऐसे में अब ऐसे सभी सनातन हिंदुओं के लिए मौका आ रहा है पांच नवंबर सोमवार से। सोमवार को है धन त्रयोदशी यानी धनतेरस। उसके दो दिन बाद यानी कार्तिक कृष्ण अमावस्या को होगी दीपावली। अब ये दोनों ही पर्व बिल्कुल निकट हैं। ऐसे में हर कोई चाहेगा इन दोनों दिनों में मां लक्ष्मी और कुबेर का पूजन-अर्चन कर अपना और अपने परिवार, कुटुंब का भाग्योदय। ऐसे में पत्रिका ने वाराणसी वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य व कर्मकांडी पंडित बृजभूषण दुबे से बात की। पंडित दुबे ने विस्तार से बताया धनतेरस व दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त साथ ही सभी 12 राशियों के जातकों किस लग्न में करें पूजन।
पंडित बृज भूषण दुबे के अनुसार 05 नवंबर सोमवार को धनत्रयोदशी है। उन्होंने बताया कि चूंकि तेरस यानी सोम प्रदोष है, ऐसे में इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष काल में ही पूजन सर्वोत्तम है। प्रदोष काल है शाम 05 से 7.30 बजे तक। इस काल में पूजन करने से व्यवयायी, वाणिज्यिक वर्ग को निश्चित लाभ होगा। व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी। मां लक्ष्मी, भगवान शंकर व पार्वती के साथ गणेश व कुबेर भी प्रसन्न होंगे।
उन्होंने बताया कि दीपावली बुधवार 07 नवंबर को है। दीपावली पर पूजन के लिए तीन लग्न खास हैं। इन लग्न, मुहूर्त में पूजन से लाभ होना तय है। एक तरह से लाटरी लग जाएगी। ये लग्न हैं कुंभ, वृष और सिंह।
पंडित दुबे के अनुसार कुंभ लग्न दोपहर 01.05 से 2.35 बजे तक रहेगा। इस काल में समस्त व्यापारी वर्ग, कल कारखानों, दुकानों आदि में मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी।
वृष लग्न का शुभ मुहूर्त है सायं 5.41 से 7.38 बजे तक। इस लग्न मुहूर्त में गृहस्थों को मां लक्ष्मी और श्री गणेश के साथ कुबेर की पूजा करनी चाहिए। इस शुभ लग्न में पूजन से सारी मनोकामना पूर्ण होगी। धन लाभ निश्चित होगा। रुके हुए काम बनेंगे। वर्ष पर्यंत धन-धान्य की कमी नहीं होगी।
तीसरा लग्न है सिंह, इस लग्न में पूजन का शुभ मुहूर्त है रात 12.09 से 02.30 बजे तक। उन्होंने बताया कि इस लग्न में व्यापारी वर्ग भी पूजन कर सकता है, अन्यथा यह लग्न में तंत्र पूजन की दृष्टि से सर्वोत्तम है।
पंडित दुबे ने बताया कि दीपावली के दिन रात में पूजन के बाद अगली सुबह सूर्योदय से पहले दरिद्र निस्तारण जरूर करना चाहिए। यह काम गुरुवार को भोर में किया जाएगा। दरिद्र निस्तारण से घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। दरिद्रता नहीं आती।
उन्होंने बताया कि इस बार दीपावली तुला, वृश्चिक व धनु राशि के जातकों के लिए सर्वोत्तम है। मकर राशि के जातकों को अपेक्षित फल की प्राप्ति में काफी संघर्ष करना होगा।
दीपावली को मां लक्ष्मी के पूजन के लिए राशि और लग्न का समन्वय
राशि- लग्न
मेष- सिंह और कुंभ लग्न
वृष- कुंभ व वृष
मिथुन- कुंभ
कर्क- वृष व सिंह
सिंह-कुंभ व सिंह
कन्या- वृष
तुला- कुंभ व सिंह
वृश्चिक- वृष व सिंह
धनु- कुंभ व सिंह
मकर-वृष
कुंभ- कुंभ, वृष व सिंह
मीन- सिंह व वृष
ज्योतिषाचार्य पंडित बृज भूषण दुबे ने बताया कि उपर्युक सभी 12 राशियों के जातक अगर अपनी राशि के अनुसार सुझाए गए लग्न मुहूर्त में मां लक्ष्मी का सविधि पूजन करते हैं तो भाग्योदय तय है। उन्होंने कहा कि वृष लग्न में पूजन सर्वोत्तम समय है। गोधुलि बेला में ही पूजन-अर्चन करना चाहिए। माता लक्ष्मी की कृपा साल भर बनी रहेगी। धन लाभ होगा, रोजी रोजगार में सफलता मिलनी निश्चित है।