वाराणसी

Depression: सिर्फ मूड में बदलाव नहीं, है जानलेवा बीमारी, पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा होती हैं पीड़ित

-Depression: न्यूरो केमिकल में घटाव या बढ़ाव से होता है डिप्रेशन-न्यूरो ट्रांसमीटर का सही काम न करना-किसी में दिखे स्वाभाविक परिवर्तन तो तत्काल ले जाएं मनोचिकित्सक के पास-पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दो गुना ज्यादा होता है अवसाद

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Dec 12, 2019
डिप्रेस्ट महिला (प्रतीकात्मक फोटो)

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी.Depression दुनिया भर में सबसे घातक बीमारी हो चली है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक डिप्रेशन हर्ट अटैक के बाद दूसरी सबसे घातक व जानलेवा बीमारी है। इसे जानना और इसका तत्काल इलाज बेहद जरूरी है। इसमें थोड़ी सी लापरवाही से व्यक्ति की जान जा सकती है। वह खुद को खत्म कर सकता है। इतना ही नहीं बीमार व्यक्ति दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इस मसले पर पत्रिका ने बात की बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के मनो चिकित्सक प्रो संजय गुप्ता से, प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अश...

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दो गुना ज्यादा होता है डिप्रेशन

डिप्रेशन जिसे हिंदी में अवसाद कहते हैं यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दो गुना ज्यादा होता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर्ट अटैक के बाद डिप्रेशन दुनिया भर में दूसरी सबसे घातक बीमारी है। डॉ गुप्ता कहते हैं कि आम तौर पर लोग इसे बीमारी समझते ही नहीं जिसके चलते बीमार की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जाती है। एक वक्त ऐसा आता है जब वह खुद को खत्म कर लेता है। उन्होंने बताया कि इसका दूसरा पहलू भी है कि डिप्रेस्ड व्यक्ति दूसरों के लिए भी घातक हो सकता है। ऐसे में इस बीमारी को पकड़ना, पहचानना और इसका इलाज बेहद जरूरी है।

इंसान के व्यवहार में बदलाव दिखे तो तत्काल ले जाएं मनोचिकित्सक के पास

वह बताते हैं कि किसी भी इंसान के रोजमर्रा की जिंदगी जीने के तरीके में अगर थोड़ा भी बदलाव दिखे तो उसे फौरन किसी काउंसलर के पास ले जाना चाहिए। यह मान लेना चाहिए कि कहीं कोई मेंटल डिस आर्डर है और इसका इलाज जरूरी है। डॉ गुप्ता बताते हैं कि आमतौर पर जब कोई यह कहता है कि उसका मन नहीं लग रहा या उसे नींद नहीं आ रही। पढने या खाने की इच्छा नहीं हो रही है। वह उदास दिखने लगे। तो यह मान लेना चाहिए कि उसके दिमाग में कही कुछ असामान्य हो गया है।

वाह्य परिवेश से नहीं डिप्रेशन व्यक्ति के भीतर से होता है

डॉ गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर लोग सामाजिक ताने-बाने या वाह्य परिवेश को किसी के अवसादग्रस्त होने का कारण मानने लगते हैं जो गलत है। दरअसल अवसाद यानी डिप्रेशन व्यक्ति के भीतर होता है उसका सामाजिक व्यवस्था या किसी वाह्य वातावरण से कोई सरोकार नहीं होता। उन्होंने बताया कि कोई ये कहे उसका खाना खाने का मन नहीं कर रहा, तो जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। नहीं तो वह पहले झूठ बोलेगा, वह बताएगा कि वह डायटिंग कर रहा है। लेकिन यह स्थिति लगातार बनी रहती है तो 10-15 किलो तक वजन गिर जाता है। घरवाले समझते हैं कि वह डायटिंग कर रहा है लेकिन वह तो डिप्रेशन के चलते खाना नहीं खा रहा होता है और उसकी खाने की अरुचि को न समझते हुए लोग उस पर दबाव न बनाएं इसलिए वह डायटिंग की बात करता है। इसे परिवार के लोगों को समझना होगा।

शहर बदलने से नहीं होता ठीक बल्कि हालात और बिगड़ते हैं

दूसरे अक्सर लोग कहते हैं कि मूड ठीक नहीं तो इसे दूसरे किसी शहर में घुमा देना चाहिए लोकेशन में चेंज होगा तो मन बदल जाएगा। लेकिन ऐसा होता नहीं है बल्कि डिप्रेशन तब और बढ़ जाता है जब लौट कर आने के बाद लोग ताना मारने लगते हैं कि इतना खर्च किया इस पर लेकिन यह तो होटल के कमरे से निकला ही नहीं। ऐसा भी नहीं करना चाहिए।

निर्णय न ले पाना भी है डिप्रेशन का लक्षण
तीसरे अगर किसी छात्र या छात्रा का पढने में मन न लग रहा हो या कोई चीज याद नहीं हो रही हो तो वह भी डिप्रेशन के चलते हो सकता है। ऑफिस में कोई अधिकारी तबके का व्यक्ति निर्णय न ले पा रहा हो तो वह भी डिप्रेशन का कारण हो सकता है।
कोई अपनी प्रिय वस्तु किसी को देने लगे तो भी ठीक नहीं

किसी का मन गिरा हो, स्फूर्ति न हो, काम में मन लगे। अगर कोई यह कहे कि जीवन में अब कुछ रखा नहीं है। वह अपनी प्रिय वस्तु को किसी को देने लगे तो यह मान लेना चाहिए कि मेंटल डिसआर्डर का केस है। कोई लगातार नकारात्मक बातें करने लगे तो भी डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। इसे तत्काल मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।

नींद पूरी न आना डिप्रेशन का कारण
किसी को नींद न आती हो या सोने के बाद बीच में नींद टूट जाती हो, सपने ज्यादा आते हों तो भी डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं। इसके चलते वह बहुधा नशे का आदी हो जाता है जो घातक होता है। एक से कई बीमारियां घर कर लेती हैं।

सेक्सुल एबिलिटी टेस्ट से गैंगरेप को बढ़ावा
इन सबके अलावा आजकल जो बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं उसके पीछे भी डिप्रेशन बड़ा कारण है। दरअसल लोग ये सोचने लगते हैं कि उनकी सेक्सुअल एक्टिविटी यानी मर्दानगी कम हो रही है। इसका टेस्ट करने के लिए भी गैंग रेप के सहभागी हो जाते हैं।

डिप्रेशन के कारण

-न्यूरो केमिकल में कमी या अधिकता से डिप्रेशन होता है या क्रोध आता है
-न्यूरो ट्रांसमीटर के असंतुलन से डिप्रेशन होता है

क्या हैं न्यूरो केमिकल
-फेरोटोनिन
- नारेपीनेफ्रिन
-ऑक्सीटोसि

कोट

" इनकी कमी या अधिकता से डिप्रेशन होता है। लेकिन अब तो 30 से ज्यादा दवाएं आ चुकी हैं बाजार में। दूसरे मनोचिकित्सक काउंसिलिंग से ही बहुत हद तक डिप्रेशन को दूर कर सकता है। इसमें न्यूनतम 60 दिन या अधिकतम 6 माह तक इलाज करना होता है। नियमित दवाएं लेनी होती हैं। काउंसलिंग करानी होती है। डिप्रेशन ज्यादा होने पर इलाज लंबा भी हो सकता है। पर इसका इलाज फौरन शुरू होना जरूरी है।" डॉ संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

Published on:
12 Dec 2019 06:47 pm
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