तीन सदस्यीय कमेटी ने सेंट्रल जेल के अधिकारियों की साथ की बैठक, कर्मचारियों से भी जानी व्यवस्था में कमी
वाराणसी. पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह शनिवार को सेंट्रल जेल पहुंचे। जेल अधिकारी व कर्मचारी से पूछा कि किस तरह जेल में असलहा पहुंचाया जा सकता है। पहले तो सभी लोग सकते में आ गये। इसके बाद खुलासा हुआ कि पूर्व डीजीपी जेल की उन खामियों को जानना चाहते हैं जिससे जेल में प्रतिबंधित चीजे चली जाती है इन खामियों को ठीक करके ही जेल की व्यवस्था में सुधार किया जा सके। हालांकि जेल अधिकारियों ने अधिकृत रुप से कोई जानकारी नहीं दी है।
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पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के साथ अपर पुलिस महानिदेशक कारागार हरिशंकर व आईजी कारागार डा.शरद भी सेंट्रल जेल में पहुंचे थे। पूर्व डीजीपी के साथ आयी दो सदस्यीय कमेटी ने जेल अधिकारी व कर्मचारी के साथ बैठक की। सूत्रों की मानेबैठक में व्यवस्था सुधार के लिए सभी से सलाह मांगने के साथ पूछा गया कि किस तरह चेकिंग करके बंदियों व कैदियों को जेल में लाया जाता है। बैरक में बंदियों की कब-कब तलाशी ली जाती है। यदि तलाशी जेल में बंदियों को लाते समय तलाशी में सावधानी नहीं बरती गयी तो किस तरह से गड़बड़ी का पता किया जा सकता है। तीन सदस्यीय टीम के सामने सभी ने व्यवस्था में सुधार को लेकर अपने सुझाव भी दिये।
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बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद गठित हुई है कमेटी
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने जेल सुधार के लिए एक कमेटी गठित की है जिसकी जिम्मेदारी पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह को सौंपी गयी है। कमेठी का उद्देश्य जेल में व्यापत खामियों को जानकारी करना है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जेल व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। ईमानदार व सख्त माने जाने वाले पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह लगातार प्रदेश की जेलों का निरीक्षण कर खामियों का पता करने में लगे हुए है इसी क्रम में पूर्व डीजीपी सेंट्रल जेल गये थे।
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गड़बड़ी के तरीकों को जानने के बाद हो सकता है सही सुधार
जेल में किस तरह से गड़बड़ी की जाती है इसकी जानकारी होने पर ही सही ढंग से सुधार किया जा सकता है। पूर्व डीजीपी इसी उद्देश्य से पूछ रहे थे कि किस तरह से जेल में असलहा एंव अन्य आपत्तिजनक चीजे पहुंचायी जा सकती है। मोबाइल फोन को कहा पर छिपा कर रखा जा सकता है। इसकी सही जानकारी होने पर जेल की व्यवस्था में बड़ा सुधार हो सकेगा।
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