
वाराणसी. बसपा की सबसे तेज तर्रार और कद्दावर नेता पूजा पाल पार्टी से निष्कासित होने के बाद नई सियासी नांव पर सवार होने की पूरा मन बना लिया है। जिसकी तैयारी में भी जोरों शोरों से जुटी हुई हैं। इसे लेकर लखनऊ में पूजा पाल की कई भाजपा नेताओं से बातचीत की खबर भी आ रही है। कहा जा रहा है कि जल्द ही यह कद्दावर नेता कमल के साथ नजर आएंगी। अगर पूजा पाल बीजेपी का दामन थामती हैं तो निश्चित तौर पर यह बीजेपी के लिए फायदेमंद होगा। लेकिन बसपा को इससे बड़ा झटका लग सकता है। पूजा पाल का भाजपा में शामिल होने की सम्भावना है।
पूर्व विधायक पूजा पाल पति की मौत के बाद पिछले करीब 13 वर्ष से बहुजन समाज पार्टी का साथ निभा रहीं थी। लेकिन बसपा ने इनपर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए पार्टी से बाहर निकाल दिया। बसपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2017 के बाद से पूजा पाल पूरी तरह निष्क्रिय होकर अपने क्षेत्र में नहीं गईं। पार्टी कार्यकर्ताओं का फोन नहीं उठाने के साथ वह पार्टी की बैठकों, सभाओं और कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हुईं। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है। अशोक के मुताबिक यह निर्णय पार्टी अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर लिया गया।
ऐसे बनी थी कद्दावर नेता
पूर्व विधायक पूजा पाल शादी के नौ दिनों बाद ही विधवा हो गई। इनके समर्थन में पूरा शहर उमड़ पड़ा और पूरे इलाहाबाद में जगह-जगह आक्रोश भड़क गया लोग सड़कों पर उतर आए और जमकर आगजनी व बवाल की घटनाएं होने लगी। कई दिनों तक बवाल के बाद मामला शांत हुआ और जब उपचुनाव और जब इलाहाबाद पश्चिमी की सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित हुई तो बसपा ने राजू पाल की पत्नी पूजा पाल को अपना कैंडिडेट घोषित कर दिया।
अतीक अहमद का तोड़ चुकी है तिलिस्म
उस विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक तौर पर पूजा पाल को जीत मिली उन्होंने अतीक अहमद के बाहुबल और धन पल को चकनाचूर करते हुए उनके भाई अशरफ को हराया था। परन्तु इससे भी ऐतिहासिक कारनामा अगले विधानसभा चुनाव में पूजा पाल ने किया और शहरी पश्चिमी सीट से चुनाव लड़े अतीक अहमद को धूल चटा दी। इस चुनाव के बाद ही अतीक अहमद के बुरे दिन भी शुरू हो गए थे पूजा पाल ने शहर पश्चिमी से अतीक अहमद के तिलिस्म को खत्म कर दिया था और अतीक अहमद व उनके गैंग के कुनबे को धूल में उड़ा दिया था।
बसपा को पहले से ही सता रहा था इस बात का डर
विधानसभा चुनाव के पहले ही पूजा पाल के भाजपा में शामिल होने की सुगबुगाहट चल रही थी। इस बीच सिद्धार्थनाथ सिंह को पार्टी ने टिकट दे दिया। इसके बाद भी उनका संपर्क भाजपा के कुछ बड़े नेताओं से बना रहा। फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की घोषणा होने के पहले उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा ने फिर जोर पकड़ लिया। इस बीच उनकी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की भी खबरें सियासी गलियारों में तैरती रहीं। यह सूचना बसपा कॉडर से जुड़े लोगों ने सुप्रीमो मायावती तक पहुंचाई तब उनकी सहमति से उनके निष्कासन की कार्रवाई की गई।