
वाराणसी. मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति का नयी सरकार में भी जलवा कायम है। लखनऊ जेल में बंद गायत्री प्रजापति को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ की पुलिस में घमासान मचा हुआ है। मजेदार बात है कि बीजेपी ने यूपी चुनाव में गायत्री प्रजापति की फरारी को लेकर चुनावी मुद्दा बनाया था और तत्कालीन अखिलेश सरकार पर जमकर हमला बोला था इसके बाद बीजेपी की सरकार आते ही पूर्व मंत्री का जलवा दिखने लगा।
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सीएम योगी आदित्यनाथ की पुलिस में गायत्री प्रजापति को क्लीन चिट देने के बाद से ही हड़कंप मचा है। गायत्री प्रजापति पर जेल में रहते हुए बनारस के जंगमबाड़ी के फर्नीचर व्यापारी अरविंद तिवारी को फोन कर 2014 में बालू खनन के टेंडर का कमीशन मांगने का आरोप लगा है। अरविंद तिवारी ने इस बात की शिकायत दशाश्वमेध पुलिस से की थी लेकिन गायत्री प्रजापति के चलते पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था इसके बाद अरविंद ने डीजीप को सारी बात बतायी थी जब जाकर पुलिस हरकत में आयी और आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गयी। दशाश्वमेध थाने के तत्कालीन दरोगा मनोज पांडेय को मामले की विवेचना सौंपी गयी। मनोज पांडेय ने मेहनत करके मजबूत साक्ष्य जुटाये। विवेचक ने गायत्री प्रजापति के दो करीबी मान सिंह रावत व अभिषेक तिवारी को इसी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। विवेचक ने मान सिंह के कब्जे से एक डायरी बरामद की थी जिसमे जेल से बनारस के करोबारी अरविंद तिवारी को धमकी में इस्तेमाल हुए सिम को भी बरामद किया था। सिमकार्ड मान सिंह की पत्नी के नाम पर था और सर्विलांस कर मोबाइल का लोकेशन निकाला गया था तो वह लखनऊ जेल ही मिला था। उस समय माना जा रहा था कि इस मामले में गायत्री प्रजापति का फंसना तय है लेकिन गायत्री प्रजापति ने बीजेपी सरकार में अपनी रसूख दिखायी और खुद को बचाने के लिए बड़ा खेल कर दिया।
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एक बड़े अधिकारी के दबाव में थाना प्रभारी ने हटाया गायत्री प्रजापति का नाम
दशाश्वमेध थाने के तत्कालीन प्रभारी बालकृष्ण शुक्ल ने एक बड़े अधिकारी के दबाव में व्यापारी को धमकी दिये जाने के मामले में गायत्री प्रजापति का नाम ही केस डायरी से हटा कर उन्हें क्लीन चिट दे दी। इस मामले की जानकारी किसी को नहीं थी। व्यापारी अरविंद तिवारी को जब इस मामले की जानकारी हुई तो उसने फिर डीजीपी से शिकायत की। इसके बाद डीजीपी ने एसएसपी आनंद कुलकर्णी से इस मामले की जानकारी मांगी तो पुलिस कप्तान भी सकते में आ गये। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ही दशाश्वमेध थाना प्रभारी बालकृष्ण शुक्ल को निलंबित कर दिया। मामले की जांच आईपीएस अमित कुमार को सौंपी गयी है। पुलिस विभाग में उस बड़े अधिकारी की जमकर चर्चा हो रही है जिसके कहने पर थाना प्रभारी ने गायत्री प्रजापति का नाम केस डायरी से हटाया था आखिर वह अधिकारी कौन है जिसको लेकर सीएम योगी की पुलिस में घमासान मचा हुआ है।
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नयी सरकार में भी कायम है गायत्री प्रजापति का जलवा
बीजेपी ने गायत्री प्रजापति को चुनावी मोहरा बना कर अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला था लेकिन जब बीजेपी सरकार आयी तो सारा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नयी सरकार में भी गायत्री प्रजापति का जलवा कायम है। पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को जेल में फोन की सुविधा मिल जाती है। पूर्व मंत्री के जब फंसने की बारी आती है तो पुलिस प्रशासन ही उन्हें बचाने में जुट जाता है। गायत्री प्रजापति के प्रकरण ने सीएम योगी आदित्यनाथ की पुलिस पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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