वाराणसी

NEW YEAR 2018: इन जगहों पर मनाए नए साल का जश्न, ये हैं बेस्ट डेस्टिनेशन

यहां मना सकते New Year Celebration

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नया साल

वाराणसी. नई आशाओं और नए सपनों के साथ पूरे धूम धाम से साल 2018 का आगाज अभी से हो रहा है। दुनियाभर में सभी को नयू ईयर सेलिब्रेशन का इंतजार होता है। इस दौरान जबरदस्त आतिशबाजी के साथ लोग जहां नए साल का स्वागत करते हैं वहीं रंग बिरंगी रोशनी और 'हैप्पी न्यू ईयर' की गूंज के साथ शहर में बड़ी तादाद में विदेशी सैलानी भी नव वर्ष पर एक-दूसरे को शुभकामना देते और लुफ्त उठाते हैं।

वहीं नया साल को सेलिब्रेट करने के लिए लोग नई जगह जाना चाहते हैं। कोई होटल, तो कोई क्लब तो वहीं कोई ऐसे स्थान पर नयू ईयर का वेलकम करना पसंद करता है जहां वह खुलकर उसका आनंद ले सके। पूर्वांचल में ऐसे कई सारे जगह हैं जहां आप अपने घर से दूर नयू ईयर सेलिब्रेट कर सकते हैं।

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राजदरी-देवदरी
राजदरी देवदरी यह ऐसी जगह है जिसका नाम लेते ही वहां चट्टानों के ऊपर कल-कल करती झरनों का दृश्य आंखों के सामने आ जाता है। यह झरनें चंद्रप्रभा वन्य अभयारण्य में हैं । इसकी स्थापना एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए की गई थी जिनकी संख्या काफी कम हो गई है । यहां पशुओं और पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। पशुओं और पक्षियों के अलावा कई आकर्षण हैं विशेषकर राजदारी और देवदारी झरनें।

सुंदर और शांत वातावरण वाली यह जगह अनुभव को नया रहस्य प्रदान करती है। इस अभयारण्य तक वाराणसी से आसानी से पहुंचा जा सकता है- यह शहर से 55 किमी है। चूंकि यहां कोई रहने की सुविधा नहीं है इसलिए लोग यहां एक दिन की यात्रा के लिए आते हैं, यहां कई भोजनालय है जहां से स्नैक्स और ड्रिंक्स आसानी से मिल जाते हैं।

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सारनाथ : बौद्ध धर्मावलंबियों का एक बड़ा तीर्थ
वाराणसी से सिर्फ 10 किमी दूर है स्थित सारनाथ जो बौद्ध धर्मावलंबियों का एक बड़ा तीर्थ है। ऐसा माना जाता है कि बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश यहीं सारनाथ में दिया था। इसे महाधर्म चक्र परिवर्तन के नाम से जाना जाता है। धमेक स्तूप और अन्य का निर्माण यह संकेत है कि उस समय इसकी क्या अहमियत रही होगी। चौखंडी स्तूप वह जगह है जहां पहली बार सारनाथ आए भगवान बुद्ध की अपने पहले पांच शिष्यों से मुलाकात हुई थी।
यह जगह धर्मराजिका स्तूप और मूलगंध कुटी विहार जैसी पुरातात्विक महत्व की संरचनाओं के लिहाज से भी खासी अहमियत रखती है। सम्राट अशोक ने 273-232 ईसापूर्व यहां बौद्ध संघ के प्रतीक स्वरूप विशालकाय स्तंभ स्थापित किया था। इसके ऊपर स्थापित सिंह आज भारत देश का राष्ट्रीय प्रतीक है। आपका न्यू ईयर इन सबके बीच बहुत ही खास हो सकता है।

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वाराणसी के प्रसिद्ध घाट
न्यू ईयर हो या कोई और सेलिब्रेशन लोगों के आंखों से घाटों की छवि नहीं हटती। झिलमिल सितारों का गंगा में नहाए छटा देखते ही बनता है। इसी नजारे व यहां के प्रसिद्ध गंगा आरती का लुफ्त उठाने के लिए विदेशी सैलानी भी दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में यहां न्यू ईयर भी खास तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है।

वहीं अस्सी घाट पर इन खास पल को सेलिब्रेट करने लोग 31 को ही पहुंच जाते हैं और न्यू ईयर का वेलकम करते हैं। तो आप भी इस खास पल का लुफ्त उठा सकते हैं।

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इलाहाबाद का मिंटो पार्क
यह पार्क सरस्वती घाट के पास स्थित है। इसमें एक पत्थर का स्मारक है। इसके शीर्ष पर चार शेरों का प्रतीक लगा हुआ है। मिंटो पार्क की नींव लॉर्ड मिंटो ने 1910 में रखी थी। यह घुमने की अच्छी जगह है।

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कुशीनगर का खास बौद्ध ऐतिहासिक स्थल
कुशीनगर बौद्ध श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां पर साल भर जापान, तिब्बत, चीन से लोग आते रहते हैं वहीं भारत से भी यहां रोजाना काफी संख्या में लोग आते हैं। यहां बुद्ध से संबंधित स्मारक तीन समूहों में हैं। मुख्य स्मारक निर्वाण मंदिर है। इसके अलावा बुद्ध को समर्पित स्तूप और मठ भी यहीं हैं।
दक्षिण-पश्चिम में माथाकुंवर मंदिर और रामभर स्तूप हैं। कुशीनगर को भगवान बुद्ध का महानिर्वाण स्थल माना जाता है। पर्यटकों को यहां आने के लिए सबसे अच्‍छा मौसम नवंबर से मार्च के बीच होता है।

Published on:
31 Dec 2017 01:10 pm
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