एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) की सेंट्रल लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में शुमार है। लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी की तर्ज पर यहां की सेंट्रल लाइब्रेरी को तैयार किया गया है। यूं तो लाइब्रेरी का निर्माण 1941 में हुआ था लेकिन इसकी स्थापना 1917 में कर दी गई थी।
एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) की सेंट्रल लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में शुमार है। लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी की तर्ज पर यहां की सेंट्रल लाइब्रेरी को तैयार किया गया है। यूं तो लाइब्रेरी का निर्माण 1941 में हुआ था लेकिन इसकी स्थापना 1917 में कर दी गई थी। तब ये लाइब्रेरी सेंट्रल हिंदू स्कूल कमच्छा में स्थापित की गई थी, बाद में बीएचयू शिफ्ट हो गई। 1921 में इसका स्थान बदलकर आर्ट्स फैकल्टी के सेंट्रल हॉल में कर दिया गया। बीएचयू की इस लाइब्रेरी में 16 लाख से अधिक पुस्तकों का खजाना है। इसमें 14 से 16वीं सदी की पांडुलिपि, ताड़पत्र, सरकारी डाक्यूमेंट, शोधपत्रों और 18वीं सदी के दुर्लभ अभिलेखों को शामिल किया गया है।
देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में शामिल है
1931 में जब बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय लंदन में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर भारत लौटे, तब उन्होंने इस लाइब्रेरी के आलीशान गोलाकार सेंट्रल हॉल का निर्माण कराया, जो कि बर्मा टीक की लकड़ी से बनाया गया। इसके लिए बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने उनकी आर्थिक मदद की थी और विश्वविद्यालय में इस आलीशान लाइब्रेरी का निर्माण कराया। शुरू में पुस्तकों का संग्रह दान स्वरूप में लिया। समय बीतते यहां कई शानदार पुस्तकों का संग्रह बन गया। 1931 में ही यहां 60,000 पुस्तकों का संग्रह हो चुका था। इसलिए आज आपको यहां 14-16वीं सदी की पांडुलिपि, ताडपत्र, सरकारी डाक्यूमेंट, शोधपत्रों, आदि को शामिल किया गया है। ये लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में शुमार है।
हजारों छात्र आते हैं लाइब्रेरी
संग्रहालय के संग्रही डी.के. सिंह और डिप्टी संग्रही विवेकानंद जैन हैं। लाइब्रेरी में आज भी बर्मा टीके से बने पुस्तकालय के आलमीरा हैं जो एकाएक अपनी ओर ध्यान खींचते हैं। विश्वविद्यालय की इस लाइब्रेरी में हजारों स्टूडेंट्स रोजाना पढ़ने आते हैं। विदेशी यूजर्स भी यहां पढ़ाई या शोध करने के लिए आते हैं।