वाराणसी

पद्मावती के बाद करणी सेना की सुनायी पड़ेगी यहां पर धमक, राजनीतिक दल होंगे लाचार

तेजी से जुड़ते जा रहे युवा, जानिए क्या है कहानी
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Updated: 30 Jan 2018, 1:35 PM IST
karni sena chhindwara
karni sena

वाराणसी. संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ सड़क पर उतर कर संघर्ष करने वाली करणी सेना अब बड़ा नाम बन चुकी है। करण सेना के जोश के आगे राज्य सरकारों ने भी घुटने टेक दिया था। करण सेना अगर संसदीय चुनाव 2019 में अपनी ताकत दिखाती है तो राजनीतिक दल लाचार हो जायेंगे।
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क्षत्रिय समाज के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली करण सेना से तेजी से युवा जुड़ते जा रहे हैं। कुछ माह पूर्व की बात की जाये तो करणी सेना को अधिक लोग नहीं जानते थे लेकिन पद्मावती फिल्म को लेकर सुर्खियों में आयी करण सेना का नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रह गया है। क्षत्रिस समाज की महिलाओं व पुरुषों ने जिस तरह से पद्मावती फिल्म के विरोध को लेकर करण सेना का समर्थन किया है उससे राजनीतिक दल भी सोच में पड़ गये हैं। सोशल मीडिया में करणी सेना तेजी से अपना विस्तार कर रही है। भविष्य में भी यही हाल रहा तो करणी सेना की संसदीय चुनाव 2019 में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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राजनीतिक दल नहीं कर रहे विरोध
वोट बैंक के चलते करणी सेना का विरोध करने से राजनीतिक दल बच रहे हैं। बीजेपी पर सबसे अधिक करणी सेना का समर्थन करने का आरोप लग रहा है। सपा, बसपा व कांग्रेस भी सड़क पर उतर कर करणी सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने का साहस नहीं दिखाया है इससे साफ हो जाता है कि यह दल भी क्षत्रिय वोटरों को नाराज नहीं करना चाहते हैं। क्षत्रिय समाज की बात की जाये तो उनका वोट कुछ नेताओं व बाहुबलियों को मिलता था लेकिन अब एक और विकल्प बन कर करणी सेना उभरी है। करणी सेना का राजनीतिक क्षेत्र में कितना प्रभाव पड़ता है यह तो समय ही बतायेगा। इतना अवश्य है कि देश में करणी सेना ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है।
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सोशल मीडिया के जरिए बढ़ रही सेना की ताकत
पूर्वांचल के युवा भी सोशल मीडिया के जरिए करणी सेना से तेजी से जुड़ते जा रहे हैं। इतने कम समय में करणी सेना ने जो मुकाम हासिल कर लिया है वह सबको चकित करने वाला है। करणी सेना के कहने पर ही बनारस में भी फिल्म पद्मावत को लेकर विरोध शुरू हो गया था।
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