वाराणसी

जेल में जिंदगी और हृदय में प्रभु राम, यह है काशी के सेंट्रल जेल की रामलीला

जावेद बने लक्ष्मण तो आमीर ने निभाया वानर का रोल

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Sep 28, 2017
जेल में जिंदगी और हृदय में प्रभु राम, यह है काशी के सेंट्रल जेल की रामलीला
Kashi Central Jail Ram Leela

वाराणसी. यहां की रामलीला प्रेम और सौहार्द का प्रतीक होती है। लक्ष्मण का जावेद तो वानर का किरदार आमीर निभा रहे हैं। बलराम को प्रभु श्रीराम की भूमिका निभाने का सौभाग्य मिला है। इसी क्रम में विनय दूबे को नल, तेज बहादुर को नील व चिकित्सक डा.चिंतामणि चौबे को रावण, प्रसून मिश्रा को अंगद और नन्हेलाल को विभीषण का रोल मिला है। न किसी की जाति देखी गयी है और न तो धर्म देखा गया। यहां की रामलीला का उद्देश्य सभी व्यक्तियों को अपने अंदर के छिपे रावण को मारना है। इन लोगों ने पहले ही अपने अंदर के रावण को मार दिया होता तो शायद यहां पर नहीं होते।

हम बात कर रहे हैं सेंट्रल जेल में होने वाली रामलीला की। रामलीला के सभी पात्रों के किरदार निभा रहे लोगों को आजीवन कारवास मिला है। कोई मिर्जापुर से आकर यहां पर सजा काट रहा है तो कोई कन्नौज का है। सेंट्रल जेल में होने वाली रामलीला की बहुत सराहना होती है। रामलीला के माध्यम से बंदियों को अपने कर्म का प्रायश्चित करने का मौका दिया जाता है। साथ ही अन्य बंदियों को यह संदेश देते हैं कि गलत रास्ते पर चलने वालों को हार मिलती है चाहे वह रावण जैसा शक्तिशाली व्यक्ति ही क्यों न हो।

हनुमान ने पल भर में खाक कर दी रावण की सोने की लंका
सेंट्रल जेल में रामलीला मंचन के दौरान लंकादहन हुआ। राकेश बने हनुमान ने समुद्र लांघ कर सीधे अशोक वाटिका पहुंचे। यहां पर माता सीता से मिलने के बाद हनुमान ने अशोक वाटिका को उजाड़ दिया। इसके बाद रावण की सेना ने प्रभु हनुमान को बंदी बना कर रावण के दरबार में लाते हैं और रावण के आदेश पर प्रभु हनुमान की पूछ में आग लगा दी जाती है। इसके बाद हनुमान जी खुद को बंधन सेे मुक्त कराने के बाद रावण की सोने की लंका में आग लगायी।कैदियों को बताया गया कि गलत राह पर चलने वाले रावण के सोने की लंका भी नहीं बची थी। सबको संदेश दिया गया कि सही राह पर चलते हुए कमाया हुआ धन ही अंत तक बचा रहता है। सेंट्रल जेल की रामलीला में खास बात रही कि रामचरित मानस की चौपाई का पाठ होता रहा और सभी बंदी हाथ जोड़ कर प्रभु वंदना के साथ झूमते रहे। यहां की रामलीला देख कर यह दावा किया जा सकता है कि शहर में होने वाली अन्य भी रामलीला को सेंट्रल जेल की रामलीला मात देने की क्षमता रखती है।

खुद के जुटाये पैसों से बंदी करते हैं रामलीला
रामलीला की सबसे खास बात है कि मंचन के लिए बंदी किसी अन्य से आर्थिक मदद नहीं लेते हैं। जेल में काम करने पर जो पैसा मिलता है उसे जोड़ कर रामलीला का आयोजन होता है। रामलीला के किरदार निभाने के लिए जेल से बाहर जो सामान की जरूरत होती है वह जेल प्रशासन लाता है। आयोजन की सारी जिम्मेदारी बंदियों की होती है। सेंट्रल जेल प्रशासन सिर्फ सहयोगी की भूमिका में रहता है।

बंदियों के अंदर छिपे भगवान का जगाना है रामलीला का उद्देश्य
सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक अम्बरीश गौड़ का कहना है कि यहां पर रामलीला कराने का उद्देश्य बंदियों के अंदर छिपे भगवान को जगाना होता है। रामलीला को लेकर बंदियों में बहुत उत्साह रहता है। वह पहले से ही इसकी तैयारी करते हैं। आपस में मिल कर रामलीला के किरदार निभाने वाले व्यक्तियों का चयन करते हैं और फिर पारम्परिक विधि के अनुसार रामलीला का मंचन होता है। जेल प्रशासन हमेशा से बंदियों को सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करता आया है और इस काम में प्रभु श्रीराम के जीवन से अच्छा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है।

Updated on:
28 Sept 2017 07:27 pm
Published on:
28 Sept 2017 01:20 pm
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