वाराणसी

भूमि अधिग्रहण कानून लागू करने को काशी के किसानों का दिल्ली कूच, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, घेरेंगे संसद

किसान पंचायत में सर्वसम्मति से लिया गया फैसला, 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री को जन्तर-मन्तर पर खून से खत लिखेंगें किसान।
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Updated: 26 Apr 2018, 7:43 PM IST
किसान पंचायत को संबोधित करते पूर्व सांसद डॉ राजेश मिश्र
किसान पंचायत को संबोधित करते पूर्व सांसद डॉ राजेश मिश्र

वाराणसी. दो दशक पुरानी मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर योजना से प्रभावित किसान जो अब तक काशी में भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत अपनी जमीन वापस मांग रहे थे। कारण कि 20 साल बाद भी यह योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी है। ऐसे में प्रभावित किसानों ने 12 दिन तक खून से पीएम को संबोधित पत्र लिखा। बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रवींद्रपुरि स्थित संसदीय कार्यालय गए थे वह पत्रक सौंपने पर किसानों का वह पत्र संसदीय कार्यालय ने स्वीकार नहीं किया। ऐसे में इन किसानों ने गुरुवार को बैरवन में किसान पंचायत कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अब वो अपने हक की लड़ाई दिल्ली में लड़ेंगे। इसके लिए वो 28 अप्रैल को दिल्ली कूच करेंगे और 30 अप्रैल को जंतर मंतर पर खून से लिखे खत के साथ प्रदर्शन करेंगे। वे दिल्ली में जा कर वाराणसी के किसानों की हकीकत लोगों के सामने रखेंगे।

मोहनसराय ट्रान्सपोर्ट नगर योजना को निरस्त करने के लिये चलाए जा रहे आंदोलन के बाद 25 अप्रैल तक सकारात्मक पहल न उठाए जाने से क्षुब्ध किसानों ने गुरुवार को बैरवन में किसान पंचायत आयोजित की। बता दें कि मांग पूरी करने के लिए वे पहले ही शासन प्रशासन को 25 अप्रैल तक की मोहलत दे चुके थे। नियत तिथि में कोई सकारात्मक पहल न होने की सूरत में आज हुई किसान पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि योजना से प्रभावित 1194 किसानों के परिवार से कम से कम एक सदस्य अपने परंपरागत किसानी औजार के साथ 28 अप्रैल को दिल्ली कूच कर अपने सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसान विरोधी चेहरे को देश के सामने उजागर करने के लिए दिल्ली की सड़कों पर भूमि अधिग्रहण कानून का अनुपालन नहीं होने का प्रमाण दिखाएंगे। इस दौरान हजारों किसानों द्वारा खून से लिखे जिन ख़तों को पीएम मोदी के संसदीय कार्यालय ने लेने से इंकार कर दिया था उसे भी दिल्लीवासियों के समक्ष रखेंगे।

किसान पंचायत के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने कहा कि मोदी सरकार, भूमि अधिग्रहण कानून की धज्जीयां उड़ा रही है। मोहनसराय ट्रान्सपोर्ट नगर योजना से प्रभावित किसानों की कानून के तहत जायज मांग पर हिटलर शाही रवैया अख्तियार किया जा रहा है। किसानों के प्रतिनिधि मंडल से मोदीजी के संसदीय कार्यालय पर पुलिस के बल पर सत्ता का दुरूपयोग कर किसानों को कार्यालय से भगाना और प्रतिनिधि मंडल से बात नहीं करना कृषि प्रधान देश का अपमान है, जिसका जबाब हम सब दिल्ली में राहुल गांधी के आह्वान पर हो रही जनाक्रोश रैली में मोदीजी की करतूत का उजागर करके देगें। उन्होंने कहा कि इसके बाद 30 अप्रैल को जंतर-मंतर पर खून से खत लिखकर किसान लोकसभा का घेराव करने के लिए कूच करेंगे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव श्वेता राय ने सैकड़ों महिलाओं को किसान विरोधी नरेन्द्र मोदी की अकर्मण्यता के खिलाफ दिल्ली कूच में शामिल होनें का संकल्प दिलवाया। श्वेता राय ने कहा कि, अन्नदाता किसान प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में अपने अस्तित्व के लिये खून से खत लिख रहे हैं और चौकीदार अपने संसदीय क्षेत्र के किसानों को अपने कार्यालय में वार्ता से भी न केवल इंकार कर रहा बल्कि पुलिस के बल पर उन्हें भगा रहा है। इसका जबाब लोकसभा में घुसकर 30 अप्रैल को दिया जाएगा।

किसान पंचायत में मेवा पटेल, कृण्ण प्रसाद पटेल "छेदी पटेल",प्रेम नरायण गुप्ता, अमलेश पटेल, गायत्री देवी, विजय गुप्ता, सुरेंद्र डाक्टर, जयप्रकाश तिवारी, सावित्री देवी, फूलचंद गुप्ता, बद्री यादव, सावित्री देवी, फूलमती, सुनीता, पंचनरायण, मुनेशर आदि मौजूद थे। पंचायत की अध्यक्षता किसान खेत मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक विनय शंकर राय मुन्ना ने की जबकि संचालन प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव श्वेता राय ने किया।

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