
वाराणसी. पंचक्रोशी परिक्रमा को काशी आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। यह यात्रा शुरू होती है विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित व्यास भवन से और संकल्प दिलाते हैं ब्यास जी। लेकिन इस बार सीएम की इस यात्रा पर ग्रहण लगता नजर आने लगा है। कारण व्यास पीठ के प्रमुख पं केदारनाथ व्यास ने शुक्रवार को अपने आवास पर यह घोषणा की कि वह सीएम को संकल्प नहीं दिलाने वाले।
बता दें कि विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने गलत तरीके से व्यास पीठ, आवास और उसमें स्थित राधा कृष्ण की विलक्षण प्रतिमा को तोड़ दिया है। इसके साथ ही मंडन मिश्र जी की प्रतिमा को वहीं फेंक दिया। इसके चलते व्यास जी इन दिनों नीलकंठ मुहल्ले में किराये के मकान में परिवार के साथ रह रहे हैं। प्रशासन के उन्हें बेघर कर देव विग्रहों को तोड़े जाने से व्यास जी काफी व्यथित हैं। इसके साथ ही अब विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर मंदिरों को तोड़े जाने और देव विग्रहों की अवमानना से भी वे काफी क्षुब्ध हैं। शुक्रवार को अपने आवास पर बातचीत के क्रम में व्यास जी ने व्यथित मन से कहा कि जो व्यक्ति मंदिरों और देव विग्रहों को तोड़ रहा है, उसे पंचक्रोशी यात्रा का कोई अधिकार नहीं है। यह सब सिर्फ एक दिखावा है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री व्यास पीठ पर यात्रा प्रारंभ करने के लिये संकल्प लेने आते हैं तो पहले उन्हें यहां गिराये गये मंदिरों का पुनर्निर्माण का संकल्प लेना होगा, अन्यथा उन्हें यात्रा करने का संकल्प नहीं दिलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि काशी मंदिरों का शहर है और उसी काशी में मंदिर और देवता नहीं रहेंगे तो फिर काशी का क्या मतलब। व्यास जी ने यह भी कहा कि ये अपने को हिन्दू कहते हैं और मुक्ति मंडप में जूता पहने जवानों की ड्यूटी लगाते हैं, जिससे हिन्दुओं की भावना आहत होती है, जबकि बगल के अन्य धर्मस्थल पर ड्यूटी देने वाले जवान कपड़े के जूते पहन कर रहते हैं।