
वाराणसी. उपेन्द्र कुशवाहा ने एनडीए से इस्तीफा देकर बीजेपी को तगड़ा झटका दे दिया है। बिहार में लगभग 8 प्रतिशत कुशवाहा जाति का उपेन्द्र कुशवाहा को बड़ा नेता माना जाता है। आरएलएसपी के बीजेपी से अलग होने पर पार्टी के पिछड़ा वर्ग के वोटरों में बिखराव शुरू हो गया है। उपेन्द्र कुशवाहा के इस्तीफा देने से बीजेपी के इस नेता का कद बढ़ सकता है जिसको लेकर अब चर्चा शुरू हो गयी है।
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यूपी चुनाव से पहले बीजेपी ने केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर, अमित शाह की रणनीति व केशव प्रसाद मौर्या के नेतृत्व में बीजेपी ने यूपी में 3254 सीटों पर चुनाव जीत कर रिकॉर्ड बनाया है। बीजेपी ने कुशवाहा वोट बैंक पर कब्जा करने के लिए मायावती के खास रहे स्वामी प्रसाद मौर्या को पार्टी में शामिल किया था। माना जाता है कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या व स्वामी प्रसाद मौर्या के चलते ही बीजेपी से मौर्य वोट बैंक का बड़ा प्रतिशत जुड़ा है जिसका फायदा बीजेपी को यूपी चुनाव में हुआ है। बीजेपी ने केशव प्रसाद मौर्या को डिप्टी सीएम बना कर मौर्य वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति बनायी थी लेकिन बिहार में उपेन्द्र कुशवाहा के इस्तीफा देते ही बीजेपी को इस मुहिम में बड़ा झटका लग सकता है। बिहार में ६ प्रतिशत से अधिक मौर्या वोटर हैं जिनका वोट वहां के सीएम नीतीश कुमार व उपेन्द्र कुशवाहा में बंटता था। बीजेपी ने मौर्य वोट बैंक में सेंधमारी के लिए ही उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी से गठबंधन किया था जो अब टूट गया है ऐसे में मौर्या वोटरों को साधे रहने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का पार्टी में कद बढऩा तय है।
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बीजेपी ने ही यादव व अन्य पिछड़ा वर्ग को अलग किया था
बीजेपी ने यूपी चुनाव से ही अन्य पिछड़ा वर्ग व यादव वोटरों को अलग कर दिया था। अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटरों को साधने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या, अपना दल की अनुप्रिया पटेल व सीएम योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का सहयोग लिया है जिसके चलते अखिलेश यादव के साथ यादव वोटर गये और और पिछड़ा वर्ग के अन्य वोटर बीजेपी से जुड़ गये थे। बीजेपी को पिछड़ा वर्ग के वोटरों को सहेजने के लिए अब डिप्टी सीएम केशव को अधिक तव्वजो देनी होगी। राजभर वोटरों के लिए बीजेपी ने राज्यमंत्री का दर्जा पाये अनिल राजभर को प्रमोट किया है जबकि पटेल वोटरों की जिम्मेदारी अनुप्रिया पटेल को सौंपी है। मौर्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटरों पर कब्जा करने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को आगे किया जायेगा। यादव वोटरों के लिए शिवपाल यादव का सपा से अलग होना बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। लोकसभा चुनाव २०१९ में बीजेपी को विजय पाने के लिए पिछड़ा वर्ग के नेताओं पर अधिक ध्यान देना होगा। ऐसा नहीं किया तो पार्टी को नुकसान उठाना तय है।
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